Ghatshila : छात्र-छात्राओं, छात्र प्रतिनिधियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा कोल्हान विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ सोमवार को घाटशिला कॉलेज में व्याप्त गंभीर शैक्षणिक अव्यवस्था, प्रशासनिक भ्रष्टाचार, धार्मिक उन्माद, मनमानी कार्यशैली एवं छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को लेकर विस्तृत वार्ता की गई।
प्रतिनिधियों ने कहा कि घाटशिला महाविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि सुदूर ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्र के हजारों गरीब एवं मेहनतकश छात्र-छात्राओं के सपनों का केंद्र है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि नेक ए ग्रेड प्राप्त महाविद्यालय आज प्रशासनिक अराजकता, भय, दबाव और पक्षपातपूर्ण व्यवस्था का शिकार बन चुका है।
छात्रों ने आरोप लगाया कि वर्तमान प्रभारी प्राचार्य प्रो. आरके. चौधरी के कार्यकाल में महाविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक स्थिति लगातार गिरती चली गई है। जिस महाविद्यालय को शिक्षा, शोध और अनुशासन का केंद्र होना चाहिए था, वहां आज विद्यार्थियों की समस्याओं की अनदेखी, शिकायतकर्ताओं को दबाने का प्रयास, प्रशासनिक संरक्षण में मनमानी तथा धार्मिक उन्माद को बढ़ावा देने जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो चुकी हैं।
छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस विषय की पढ़ाई महाविद्यालय में होती ही नहीं, उसी विषय के शिक्षक को वर्षों से प्रभारी प्राचार्य बनाकर आखिर किस हित की राजनीति की जा रही है? यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि महाविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा के साथ खुला मजाक है।
प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि महाविद्यालय में नामांकन एवं पंजीयन के नाम पर लगातार अनियमितताओं और फर्जीवाड़े की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे छात्रों के बीच भारी आक्रोश व्याप्त है।
प्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि महाविद्यालय परिसर को शिक्षा के केंद्र के बजाय धार्मिक प्रदर्शन एवं व्यक्तिगत प्रभाव स्थापित करने के मंच में बदला जा रहा है। कॉलेज परिसर में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन कर उसका व्यक्तिगत नेतृत्व करना न केवल शैक्षणिक वातावरण को दूषित करता है, बल्कि विभिन्न समुदायों के बीच असहजता एवं तनाव की स्थिति भी उत्पन्न करता है। शिक्षा संस्थानों का कार्य वैज्ञानिक सोच, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना है, न कि धार्मिक उन्माद को बढ़ावा देना।
अराजक तत्वों का बढ़ रहा मनोबल
छात्र नेताओं ने कहा कि महाविद्यालय में असामाजिक तत्वों का मनोबल लगातार बढ़ता जा रहा है। छात्रों की शिकायतों पर कार्रवाई करने के बजाय दोषियों को संरक्षण देने का आरोप लगातार सामने आ रहा है। इससे छात्र-छात्राओं के बीच भय एवं असुरक्षा का वातावरण बन गया है।
इसके साथ ही, वर्षों से कुछ स्थायी शिक्षकों का स्थानांतरण नहीं होना भी गंभीर चिंता का विषय है।
घाटशिला कॉलेज में बढ़ रही गुटबाजी
यूजीसी के नियमों एवं शैक्षणिक मर्यादाओं के विपरीत लंबे समय तक एक ही स्थान पर जमे रहने के कारण महाविद्यालय में “स्थायी लॉबी” और “दबाव तंत्र” विकसित हो चुका है। इससे पारदर्शिता समाप्त हो रही है, जवाबदेही खत्म हो रही है और मनमानी चरम पर पहुंच चुकी है। प्रतिनिधियों ने कहा कि घाटशिला महाविद्यालय आज शिक्षा से ज्यादा भ्रष्ट प्रशासनिक संस्कृति, गुटबाजी और संरक्षणवाद का केंद्र बनता जा रहा है। यदि समय रहते इस स्थिति पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले समय में इसका गंभीर दुष्परिणाम पूरे शैक्षणिक वातावरण पर पड़ेगा।
प्रभारी प्राचार्य का स्थानांतरण करने की मांग
प्रभारी प्राचार्य प्रो. आर.के. चौधरी का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण किया जाए। प्रो. इंदल पासवान एवं प्रो. एस.पी. सिंह का भी अविलंब स्थानांतरण सुनिश्चित किया जाए। महाविद्यालय में व्याप्त नामांकन, पंजीयन एवं प्रशासनिक अनियमितताओं की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए।
कॉलेज परिसर में धार्मिक उन्माद एवं असामाजिक गतिविधियों को संरक्षण देने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कुलपति महोदय की अनुपस्थिति में कुलसचिव की उपस्थिति में प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता की गई। वार्ता के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से यह आश्वासन दिया गया कि आगामी 22 मई तक छात्रों की मांगों पर सकारात्मक एवं ठोस कार्रवाई की जाएगी।
मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन करेंगे छात्र
छात्र प्रतिनिधियों ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 22 मई तक विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई, तो संयुक्त छात्र संघ चरणबद्ध अनिश्चितकालीन उग्र आंदोलन शुरू करेगा। आंदोलन के तहत विश्वविद्यालय घेराव, तालाबंदी, अनिश्चितकालीन धरना एवं जरूरत पड़े तो भूख हड़ताल जैसे व्यापक छात्र आंदोलन चलाया जाएगा।
मौके पर संयुक्त छात्र संघ से विकास हेम्ब्रम, रामदास मुर्मू, सुबोध कुमार माहली, पीपुन बारिक, सनातन पिंगवा,बलराम मार्डी, दुलाल हेम्ब्रम, कृष्णा मार्डी, अंजली किस्कु, प्रतिमा मुर्मू,लक्ष्मी किस्कू, रेखा मुर्मू सहित अन्य छात्र प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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