चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के उपायुक्त मनीष कुमार एक ओर जहां जिले को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य लेकर लगातार दिशा-निर्देश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर टीबी से जूझ रही 12 वर्षीय छात्रा रागिनी जिंदगी की जंग हार गई। इस घटना से सदर अस्पताल चाईबासा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
इलाज के दौरान तोड़ा दम
रागिनी का इलाज सदर अस्पताल में चल रहा था। सूत्रों के अनुसार, उसकी हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उसे बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल से बाहर रेफर किया था। आरोप है कि परिजनों के बिछड़ने और अस्पताल के चिकित्सकों की सुस्ती के कारण रागिनी को समय पर रेफर नहीं किया जा सका और इसी बीच उसकी मौत हो गई।
स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल
पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय पर रेफर कर दिया जाता तो शायद बच्ची की जान बच सकती थी। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन है।
सिविल सर्जन ने दी जानकारी
सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी ने बताया कि बच्ची का इलाज विगत कई दिनों से अस्पताल में चल रहा था। उसे टीबी के साथ लिम्फैडेनोपैथी समेत अन्य कई तरह की बीमारियां थीं। उन्होंने कहा कि रागिनी का परिवार भी मौके पर नजर नहीं आ रहा है।
जिले में टीबी उन्मूलन पर उठे सवाल
उपायुक्त द्वारा टीबी मुक्त जिला बनाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के बीच इस तरह की घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। 12 वर्षीय नाबालिग की मौत से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप है। लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। सदर अस्पताल में पहले भी इलाज में लापरवाही के आरोप लगते रहे हैं।
Read Also: West Singhbhum News: “12 साल सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को समर्पित” : सांसद अनंत नायक

