चतरा : नववर्ष का स्वागत और पिकनिक मनाने के लिए चतरा जिले के पर्यटन स्थल इस समय विशेष रूप से आकर्षक बन गए हैं। इन स्थलों में से एक प्रमुख आकर्षण है खैवा-बंदारू जलप्रपात, जो लावालौंग वनप्राणी अभ्यारण में स्थित है। यहाँ की हसीन वादियाँ और प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों को अपनी ओर खींचती हैं। पिकनिक और नववर्ष के स्वागत के लिए यहाँ भारी भीड़ उमड़ती है, जो इस स्थल को और भी आकर्षक बनाती है।
स्थान और प्राकृतिक सौंदर्य
खैवा-बंदारू जलप्रपात चतरा जिले के मुख्यालय से उत्तर पश्चिम की दिशा में लगभग आठ किलोमीटर और लावालौंग प्रखंड मुख्यालय से पूर्व दिशा में दस किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह जलप्रपात प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य का एक जीवंत उदाहरण है, जहाँ पत्थरों को तराशकर सुंदर आकृतियाँ बनाई गई हैं। इन प्राकृतिक संरचनाओं और पुरातात्विक कलाकृतियों को देखकर पर्यटक विस्मित रह जाते हैं। जलप्रपात के बहाव में पत्थरों के रूप और आकार की एक अलग ही सुंदरता छिपी हुई है, जो यहां आने वाले हर पर्यटक को एक अद्वितीय अनुभव देती है।
प्राकृतिक ध्वनि और अद्भुत दृश्य
इस जलप्रपात की खासियत यह है कि यहां का वातावरण पूरी तरह से शांति और सुंदरता से भरा हुआ है। अगर यहां कोई पत्थर फेंका जाए, तो उसकी प्रतिध्वनि बड़ी ही सुरीली सुनाई देती है। यहां के झरने की कलकल और फेन उगलते पानी की आवाज पर्यटकों को एक अलग दुनिया में ले जाती है। दूर से पंख फड़फड़ाते कबूतर और आसपास की हरियाली इस स्थल की खूबसूरती को और भी बढ़ा देती है।
सैलानियों की भीड़
खैवा-बंदारू जलप्रपात सालभर पर्यटकों से भरा रहता है, लेकिन नववर्ष के पहले दिन (1 जनवरी) और मकर संक्रांति के दौरान (14-15 जनवरी) यहां विशेष रूप से सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ती है। लोग अपने परिवार और बच्चों के साथ यहां पिकनिक मनाने आते हैं और यहां के मनमोहक दृश्यों में खो जाते हैं। मकर संक्रांति पर विशेष रूप से लोग यहां स्नान करने, ध्यान करने और पुण्य कमाने के लिए आते हैं, जो इस स्थल को धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाता है।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
खैवा-बंदारू जलप्रपात न केवल एक पर्यटन स्थल है, बल्कि यह धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। आसपास के आदिवासी समुदाय के लोग अपने पूर्वजों की अस्थियों को विधि-विधान से विसर्जित करने के लिए यहां आते हैं। इसके अलावा, बुरी शक्तियों से मुक्ति के लिए भी लोग यहां पूजा अर्चना करते हैं।
आसपास का दृश्य
यह जलप्रपात चतरा-रांची मुख्य पथ पर चंदवा से दक्षिण-पश्चिम दिशा में लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह जंगलों के बीच एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है, जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। जलप्रपात के आस-पास पत्थर की दीवारें और गहरी खाइयाँ बनती हैं, जो इस स्थल की प्राकृतिक सुंदरता को और भी निखार देती हैं।

