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मणिपुर: लिलोंग में तनाव के बाद कर्फ्यू, वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ उग्र प्रदर्शन

by Neha Verma
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इंफाल: मणिपुर के थौबल जिले के लिलोंग विधानसभा क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष असकर अली के घर में आगजनी की बड़ी घटना के बाद जिला प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया है। प्रशासन ने यह फैसला क्षेत्र में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करने और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया।

क्या हुआ लिलोंग में?

घटना रविवार रात की है जब लिलोंग के सम्ब्रुखोंग मामेई क्षेत्र में हजारों की संख्या में लोग एकत्र हुए। पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग सात से आठ हजार लोगों की भीड़ ने असकर अली के घर पर हमला कर दिया और उसे आग के हवाले कर दिया। यह हिंसक प्रतिक्रिया असकर अली के उस बयान के बाद सामने आई जिसमें उन्होंने वक्फ संशोधन अधिनियम का समर्थन किया था। विरोध बढ़ता देख अली ने अपने बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी, लेकिन तब तक स्थिति बिगड़ चुकी थी।

क्या है वक्फ संशोधन कानून?

वक्फ संशोधन विधेयक को हाल ही में भारतीय संसद द्वारा पारित किया गया था और इसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंजूरी दे दी है। इस कानून को लेकर खासकर मुस्लिम समुदाय में असंतोष देखा जा रहा है। लोगों का मानना है कि यह कानून उनके धार्मिक और सामाजिक अधिकारों पर असर डाल सकता है।

प्रदर्शन और झड़पें

रविवार को इंफाल घाटी के विभिन्न हिस्सों में वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। अनुमान के अनुसार, करीब पांच हजार लोग इन प्रदर्शनों में शामिल हुए। ये प्रदर्शन खासकर थौबल और इरोंग चेसाबा क्षेत्रों में उग्र हो गए, जहाँ प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें भी हुईं। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और वक्फ कानून की कड़ी निंदा की।

सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

इन घटनाओं के बाद प्रशासन ने बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है, जिसके तहत पांच या अधिक लोगों के एक साथ एकत्र होने और किसी भी प्रकार के हथियार लेकर चलने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया है। मुस्लिम बहुल इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की और हिंसा को रोका जा सके।

स्थिति पर निगरानी

स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और शांति बहाली के प्रयास किए जा रहे हैं। जिला अधिकारी और पुलिस बल लगातार गश्त कर रहे हैं और किसी भी अफवाह या भड़काऊ बयान पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

इस घटना ने मणिपुर की पहले से ही संवेदनशील स्थिति को और भी जटिल बना दिया है, और अब देखना होगा कि प्रशासन किस तरह से हालात पर नियंत्रण पाता है और लोगों के बीच विश्वास बहाल करता है।

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