Jamshedpur : जमशेदपुर के आसपास के गांव कीताडीह बागबेड़ा, छोटा गोविंदपुर, परसुडीह, घोड़ाबांदा आदि के ग्रामीण अपनी ग्राम पंचायतों को नगर निकाय में शामिल नहीं होने देना चाहते। यहां के ग्रामीणों का कहना है कि अगर उनके क्षेत्र को नगर निकाय में शामिल कर दिया गया तो उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ेगा। एक ग्रामीण का कहना है कि जुगसलाई में घरों से कचरा एकत्र करने के लिए पैसा लिया जाता है। इसके अलावा, भारी भरकम होल्डिंग टैक्स लिया जाता है। अगर उनके क्षेत्र भी नगर निकाय में शामिल हो गए तो उन्हें यह सब शुल्क देने होंगे। इन ग्राम पंचायत के मुखियाओं ने बुधवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को संबोधित ज्ञापन डीसी अनन्य मित्तल को सौंपा।
इस ज्ञापन में मांग की गई है कि उनके क्षेत्र को ग्राम पंचायत ही बने रहने दिया जाए। उनके इलाकों को नगर निकाय में शामिल ना किया जाए। इन मुखियाओं का कहना है कि उनके क्षेत्र को नगर पंचायत में तब्दील करने की प्रक्रिया चल रही है। इस प्रक्रिया को रोकने की मांग की गई है। बागबेड़ा के राकेश मार्डी ने बताया कि वह लोग जमशेदपुर प्रखंड कार्यालय पर भी एक बड़ा प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं। जल्द ही वहां एक बड़ा आंदोलन होगा।
क्या है सरकार की मंशा
सरकार की मंशा है कि जमशेदपुर से सटी पंचायत को नगर निकाय बनाया जाए। पहले यहां छोटा गोविंदपुर, गदड़ा, परसुडीह, बागबेड़ा आदि को मिलाकर एक नया नगर निकाय बनाने का प्रस्ताव था। लेकिन अब सरकार सोच रही है कि जुगसलाई नगर परिषद के आसपास का क्षेत्र बागबेड़ा, कीताडीह आदि को जुगसलाई में ही जोड़ दिया जाए। गौरतलब है कि साल 2019 में नगर विकास विभाग ने जिला प्रशासन को शहर से सटी पंचायतों को नगर निकाय में तब्दील करने का प्रस्ताव भेजा था। ग्रामीण इलाकों में इसका विरोध हुआ था। इसके बाद प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया था।
क्या है प्रावधान
नियमानुसार जिस क्षेत्र में की आबादी 5000 से अधिक है। उसे नगर पंचायत बनाया जा सकता है। इसकी एक और शर्त है कि इस इलाके के लोग खेती पर निर्भर ना हों। बताया जा रहा है कि जमशेदपुर से सटे जो भी इलाके हैं और वहां लोग खेती पर निर्भर नहीं हैं। इसलिए इन इलाकों को नगर निकाय में शामिल किया जा सकता है।

