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RANCHI NEWS: कविता और आलोचना के गहरे रिश्ते पर काव्य शिविर में बोले वक्ता-कविता व्यक्ति को बनाती है बेहतर इंसान

by Vivek Sharma
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रांची: मोरहाबादी के डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान में गुरुवार को तीन दिवसीय काव्य शिविर का उद्घाटन किया गया। जिसमें कविता और आलोचना के आपसी संबंध, समकालीन चुनौतियों और नई रचनात्मकता की खोज को लेकर गंभीर विमर्श हुआ। शिविर का आयोजन प्रगतिशील लेखक संघ, शब्दकार और साहित्य कला फाउंडेशन जमशेदपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। जिसमें स्वागत भाषण रश्मि शर्मा ने दिया। उन्होंने कहा कि समकालीन कविता और आलोचना की चुनौतियों पर गहन चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आलोचना के बिना साहित्य में सच्चे मूल्य और संवेदना की समझ संभव नहीं है। वहीं उद्घाटन सत्र में वरिष्ठ आलोचक रविभूषण ने कविता की मूल प्रकृति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कविता मनुष्य के जन्म के साथ ही उत्पन्न हुई होगी और यह संवेदनशीलता, प्रेम व मानवता का विस्तार है। उन्होंने कविता को आत्मविकास का साधन बताया, जो व्यक्ति को बेहतर इंसान बनाती है।

साहित्यकारों ने रखे विचार

कथाकार रणेंद्र ने कविता को आज के सामाजिक और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि कविता रचना प्रक्रिया में सृजन के तीन महत्वपूर्ण क्षण होते हैं, जिन्हें रचनाकार को समझना आवश्यक है। अशोक प्रियदर्शी, पंकज मित्र, प्रो. मिथिलेश कुमार सिंह, महादेव टोप्पो और प्रो. नजरूल इस्लाम जैसे प्रमुख साहित्यकारों ने भी विचार रखे। वक्ताओं ने आलोचना की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि आलोचना साहित्य में मूल्यबोध और संवेदना की समझ विकसित करती है। बिना आलोचना के साहित्य का आत्ममंथन संभव नहीं है।

जीवन में आशा का संचार करती है कविता

डॉ मिथिलेश कुमार सिंह ने कहा कि कविता जीवन में आशा का संचार करती है और मानवता की ओर प्रेरित करती है। महादेव टोप्पो ने आदिवासी जीवन दृष्टि की उपस्थिति को कविता में महत्वपूर्ण बताया। इस अवसर पर संस्थान की उप निदेशक मोनिका टूटी ने कहा कि यह शिविर शोधार्थियों और नवोदित रचनाकारों के लिए एक अमूल्य अवसर है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रज्ञा गुप्ता ने किया जबकि स्वागत वक्तव्य रश्मि शर्मा ने दिया।

कविता के गुणधर्म पर की गई चर्चा

पहले दिन के विभिन्न सत्रों में डॉ अनामिका प्रिया ने कविता के गुणधर्मों पर चर्चा की, जबकि डॉ. अशोक प्रियदर्शी ने जयशंकर प्रसाद की ‘कामायनी’ पर विस्तार से व्याख्यान दिया। वहीं डॉ. रमेश प्रसाद गुप्त ने कविता की रचना प्रक्रिया पर जानकारी साझा की। शिविर में करीब 75 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें कई युवा रचनाकार और शोधार्थी भी शामिल रहे। कार्यक्रम में डॉ जिन्दर सिंह मुंडा, भारती, सत्या शर्मा, कुमारी उर्वशी, ईशप्रिया, वीणा श्रीवास्तव, कमल, राकेश मिश्र, दीपिका कुमारी, और इप्टा के मो. इबरार भी उपस्थित थे।

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