Chaibasa : पश्चिमी सिंहभूम जिले में चक्रधरपुर से चाईबासा रूट पर छोटा हाथी यात्री वाहन यात्रियों की जान जोखिम में डालकर दौड़ रहे हैं। चंद पैसों के लालच में वाहन मालिक क्षमता से कई गुना अधिक सवारियां बैठाकर सफर करा रहे हैं, लेकिन परिवहन विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
रोज 50-80 गाड़ियां, हर गाड़ी में 40-50 यात्री
जानकारी के अनुसार चक्रधरपुर स्टेशन से रोजाना 50 से 80 छोटा हाथी गाड़ियां चाईबासा के लिए रवाना होती हैं। इन वाहनों में नीचे से लेकर ऊपर छत तक ठूंस-ठूंस कर 40 से 50 यात्रियों को बैठाया जाता है। ओवरलोडिंग के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
बिना कागज का दौड़ रहे वाहन
स्थानीय लोगों का कहना है कि इनमें से अधिकांश गाड़ियों का इंश्योरेंस, फिटनेस, प्रदूषण, परमिट आदि फेल है। कागजात पूरे नहीं होने के कारण दुर्घटना में यात्रियों की मौत पर परिजनों को मुआवजा भी नहीं मिलेगा। इसके बावजूद सड़क पर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
डीटीओ ने नहीं उठाया फोन
इस गंभीर मामले पर पश्चिमी सिंहभूम के जिला परिवहन पदाधिकारी गौतम कुमार से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। डीटीओ की चुप्पी से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
डीसी गंभीर, फिर भी नियमों की अनदेखी
एक तरफ जिले के उपायुक्त मनीष कुमार सड़क सुरक्षा को लेकर काफी गंभीर हैं और लगातार अभियान चला रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ चक्रधरपुर-चाईबासा मार्ग पर खुलेआम नियम के विरुद्ध वाहन चलाए जा रहे हैं। कहीं भी जांच या कार्रवाई न होने से छोटा हाथी मालिकों का हौसला बुलंद है।
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए ओवरलोड वाहनों पर तत्काल रोक लगाई जाए। दोषी वाहन मालिकों और चालकों पर कड़ी कार्रवाई हो, साथ ही रूट पर नियमित जांच अभियान चलाया जाए, ताकि भविष्य में कोई बड़ा हादसा न हो।
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