Ranchi: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के हस्तक्षेप और प्रयासों के चलते नाइजर में अपहृत झारखंड के पांच प्रवासी श्रमिकों को आठ माह बाद सुरक्षित मुक्त करा लिया गया है। यह सभी श्रमिक अफ्रीकी देश नाइजर में कल्पतरु ट्रांसमिशन लाइन कंपनी में कार्यरत थे। पिछले साल अप्रैल में हथियारबंद लोगों ने इन श्रमिकों का अपहरण कर लिया था।
इन श्रमिकों को आठ माह बाद रिहा कराया जा सका है।राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष ने सभी मुक्त श्रमिकों से दूरभाष पर बातचीत कर उनकी वर्तमान स्थिति की जानकारी ली है। मेडिकल जांच और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद श्रमिकों को हवाई मार्ग से झारखंड लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।मुख्यमंत्री को जैसे ही गिरिडीह जिले के बगोदर थाना क्षेत्र के ग्राम दोन्दलो और मुंडरो के इन श्रमिकों के अपहरण की जानकारी मिली, उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया।
इसके बाद कंपनी प्रबंधन, स्थानीय प्रशासन, भारतीय दूतावास (नियामी, नाइजर) और विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय स्थापित कर रिहाई के प्रयास तेज किए गए।बताया गया कि यह घटना एक बड़े मिलिट्री ऑपरेशन से जुड़ी थी, जिसमें 26 स्थानीय नागरिकों सहित विभिन्न देशों के कुल 38 श्रमिकों को बंधक बनाया गया था।
लंबे प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय के बाद सभी को सुरक्षित मुक्त कराया गया।इधर, मुख्यमंत्री के निर्देश पर गिरिडीह जिला प्रशासन ने अपहृत श्रमिकों के परिजनों को सामाजिक सुरक्षा की विभिन्न योजनाओं से आच्छादित किया। इनमें आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, उज्ज्वला योजना, आवास योजना, मनरेगा जॉब कार्ड, पेंशन योजना, ई-श्रम पंजीकरण, नल-जल योजना सहित अन्य कल्याणकारी योजनाएं शामिल हैं।राज्य सरकार के इस मानवीय और त्वरित प्रयास की व्यापक सराहना हो रही है।

