Chaibasa : पश्चिमी सिंहभूम जिले के घने सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों के लगातार चल रहे अभियान और बढ़ते पुलिसिया दबाव के कारण नक्सलियों में दरार पड़ती नजर आ रही है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार सारंडा क्षेत्र में सक्रिय आधा दर्जन से अधिक नक्सली अब आत्मसमर्पण करने की तैयारी में हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में वे जिला पुलिस मुख्यालय पहुंचकर सरेंडर कर सकते हैं।
जानकारी के मुताबिक गृह मंत्रालय के आदेश के बाद 31 मार्च तक सारंडा को नक्सल मुक्त बनाने का आदेश आते ही क्षेत्र में सीआरपीएफ, झारखंड जगुआर और कोबरा बटालियन द्वारा लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई और रणनीतिक दबाव के कारण नक्सली संगठन कमजोर पड़ते जा रहे हैं। पिछले कुछ समय में कई नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला करते हुए जिला पुलिस केंद्र में सामूहिक रूप से आत्मसमर्पण किया था।
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक जिले में नक्सल प्रभाव अब काफी हद तक कम हो चुका है। फिलहाल जराईकेला, मनोहरपुर, छोटानागरा और किरीबुरू थाना क्षेत्र के कुछ इलाकों में ही नक्सलियों की गतिविधियां शेष बची हैं। इन क्षेत्रों को पूरी तरह नक्सलमुक्त बनाने के लिए सुरक्षा बल लगातार संयुक्त अभियान चला रहे हैं।
सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन, झारखंड जगुआर और जिला पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से नक्सलियों पर लगातार दबाव बना हुआ है। इसी का परिणाम है कि अब कई उग्रवादी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की राह चुन रहे हैं।
सारंडा में चल रही है आर पार की लड़ाई
पुलिस अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द ही कुछ और नक्सली आत्मसमर्पण कर सकते हैं, जिससे पश्चिमी सिंहभूम जिले को नक्सलमुक्त बनाने की दिशा में बड़ी सफलता मिल सकती है। हालांकि सुरक्षा बलों ने पूरी तरह सारंडा को 31 मार्च तक नक्सल मुक्त के लिए आर पार की अंतिम लड़ाई लड़ रहे हैं। इसी का खौफ नक्सलियों में सबसे ज्यादा है।

