रांची। झारखंड में राशन वितरण व्यवस्था को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। लंबे समय तक अनाज का उठाव नहीं करने वाले राज्य के 4,24,404 राशन कार्ड धारियों के नाम लाभुकों की सूची से हटा दिए गए हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक राशन पहुंचाना और फर्जी या निष्क्रिय कार्डों को हटाना बताया जा रहा है।
75 प्रतिशत लाभुक ऐसे हैं जो महीनों से नहीं कर रहे राशन का उठाव
खाद्य आपूर्ति विभाग की जांच में सामने आया है कि कुल राशन कार्ड धारियों में करीब 75 प्रतिशत तक ऐसे लोग हैं, जो कई महीनों से राशन लेने नहीं पहुंचे। अधिकारियों के अनुसार, इसका एक बड़ा कारण यह हो सकता है कि कई लाभुक रोजगार या रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे शहरों या राज्यों में चले गए हैं, जिससे वे नियमित रूप से राशन नहीं ले पा रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में ‘साइलेंट राशन कार्ड’ धारियों की संख्या 8,02,685 तक पहुंच गई है। ये वे लोग हैं जिनके नाम पर राशन कार्ड तो जारी है, लेकिन वे लंबे समय से इसका उपयोग नहीं कर रहे हैं। ऐसे मामलों में प्राथमिक तौर पर उन 4.24 लाख लाभुकों के नाम हटाए गए हैं, जिनकी कोई स्पष्ट जानकारी विभाग के पास उपलब्ध नहीं थी।
पूर्वी सिंहभूम में सबसे ज्यादा 1.47 लाख से अधिक कार्ड रद्द किए गए
जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो पूर्वी सिंहभूम में सबसे ज्यादा 1.47 लाख से अधिक कार्ड रद्द किए गए हैं। इसके अलावा धनबाद, पश्चिम सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में नाम काटे गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया अभी जारी है और करीब 1,95,142 राशन कार्डों की जांच बाकी है। ऐसे में आने वाले समय में और भी नाम सूची से हटाए जा सकते हैं।
सरकार का मानना है कि इस कदम से राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता आएगी और वास्तविक जरूरतमंदों को इसका लाभ मिलेगा। वहीं, जिन लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, वे आवश्यक दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराकर दोबारा सत्यापन की प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं।

