रांची। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) से जुड़े बहुचर्चित गबन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। यह मामला लगभग 3.89 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय घोटाले से जुड़ा हुआ है, जिसमें सरकारी धन के दुरुपयोग के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
ईडी के रांची जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत विशेष न्यायाधीश (सीबीआई-सह-पीएमएलए) की अदालत में अभियोजन शिकायत दर्ज की है। जिन आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उनमें केवीआईसी रांची के तत्कालीन अधिकारी सुनील कुमार, बिनोद कुमार बैठा सहित अन्य सहयोगी शामिल हैं।
सुनियोजित साजिश के तहत की गई थी घोटाले की शुरुआत
जांच एजेंसी के अनुसार, इस घोटाले की शुरुआत एक सुनियोजित साजिश के तहत की गई थी। आरोप है कि मुख्य आरोपी ने अपने सहयोगियों और रिश्तेदारों के साथ मिलकर फर्जी कंपनियां और काल्पनिक इकाइयां बनाई।
इन कंपनियों के जरिए खादी सुधार एवं विकास कार्यक्रम (केआरडीपी) के तहत स्वीकृत राशि को बिना किसी वास्तविक कार्य के निजी खातों में ट्रांसफर कर लिया गया।
ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने बैंक खातों और दस्तावेजों का दुरुपयोग करते हुए रकम को अलग-अलग माध्यमों से घुमाया, ताकि उसकी असली स्रोत को छिपाया जा सके। बाद में इस धन को अचल संपत्तियों में निवेश कर वैध बनाने की कोशिश की गई। खासतौर पर रांची के ओरमांझी इलाके में संपत्ति खरीदने के मामले भी जांच के दायरे में आए हैं।
पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य की पहचान के लिए जांच जारी
जांच के दौरान ईडी ने छापेमारी भी की और करीब 71.91 लाख रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया। इसके अलावा, लगभग 31 लाख रुपये की राशि, जो एक ट्रस्ट के माध्यम से ट्रांसफर की गई थी, उसे भी वापस जमा कराया गया है।
यह मामला फिलहाल विशेष अदालत में विचाराधीन है। ईडी का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए आगे की जांच जारी है। इस कार्रवाई को सरकारी धन के दुरुपयोग के खिलाफ एक बड़ी पहल माना जा रहा है।
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