रांची। झारखंड में कोरोना काल के दौरान बड़े पैमाने पर हुई जंगल कटाई के मामले में जांच में देरी को लेकर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई है और उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
हाई कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद शामिल हैं, ने मामले की सुनवाई करते हुए सीआईडी के एडीजी और जांच अधिकारी को अगली सुनवाई में उपस्थित रहने का आदेश दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि समय पर जांच पूरी नहीं की गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है।
जांच में हो रही देरी पर सवाल
पिछली सुनवाई में अदालत ने जांच की अद्यतन स्थिति रिपोर्ट मांगी थी। इसके जवाब में बताया गया कि जांच अभी भी जारी है। इस पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने भी जांच एजेंसी की धीमी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि वन विभाग की ओर से आवश्यक दस्तावेज सीआईडी को उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। याचिकाकर्ता के वकीलों ने अदालत को बताया कि यदि दस्तावेज नहीं मिल रहे हैं तो जांच एजेंसी को सख्त कदम उठाने चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है।
कई जिलों में हुई थी अवैध कटाई
याचिका में कहा गया है कि कोरोना काल के दौरान पलामू, गढ़वा, जामताड़ा और लोहरदगा समेत कई जिलों में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से पेड़ों की कटाई की गई। इसमें पुलिस और वन विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत होने का भी आरोप है। इस संबंध में दस्तावेज और तस्वीरें भी अदालत को सौंपी गई हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने पहले ही इस मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी थी। अदालत को यह भरोसा दिलाया गया था कि जांच जल्द पूरी कर ली जाएगी, लेकिन अब तक रिपोर्ट सामने नहीं आने से कोर्ट ने सख्ती दिखाई है।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को तय की है। उस दिन सभी संबंधित अधिकारियों को केस से जुड़े दस्तावेजों के साथ कोर्ट में उपस्थित होना होगा। अब देखना होगा कि जांच एजेंसी इस मामले में कितनी तेजी दिखाती है।

