Jamshedpur : उत्तर प्रदेश के वृंदावन में दुनिया का सबसे ऊंचा आध्यात्मिक केंद्र चंद्रोदय मंदिर तेजी से आकार ले रहा है। इस्कॉन बेंगलुरु द्वारा बनाए जा रहे इस भव्य मंदिर में आधुनिक इंजीनियरिंग और आध्यात्मिकता का अनोखा संगम देखने को मिलेगा।इस महत्वाकांक्षी परियोजना में टाटा स्टील अपनी खास ‘इको-फ्रेंडली’ तकनीक के जरिए अहम भूमिका निभा रही है, जिससे मंदिर की नींव को असाधारण मजबूती दी जा रही है।
मंदिर की ऊंचाई करीब 210 मीटर (लगभग 700 फीट) होगी, जो इसे देश ही नहीं, दुनिया के सबसे ऊंचे मंदिरों में शामिल करेगी। तुलना करें तो यह कुतुब मीनार से लगभग तीन गुना ऊंचा होगा।मंदिर का डिजाइन पिरामिड शैली में तैयार किया गया है, जिसकी नींव करीब 55 फीट गहरी रखी गई है। दावा किया जा रहा है कि इसकी नींव का विस्तार दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा से भी अधिक प्रभावशाली है।
भूकंप और तूफान से सुरक्षित रहेगा मंदिरइस मंदिर को अगले 1000 वर्षों तक सुरक्षित रखने के लक्ष्य के साथ बनाया जा रहा है। इसकी संरचना इतनी मजबूत होगी कि यह रिक्टर स्केल पर 8 तीव्रता तक के भूकंप और 170 किमी/घंटा की रफ्तार वाले तूफान को भी झेल सकेगी।टाटा स्टील का ‘ड्यूरेका’ बना मजबूती की कुंजीमंदिर की नींव को मजबूत बनाने के लिए टाटा स्टील के इंडस्ट्रियल बाई-प्रोडक्ट मटेरियल डिवीजन द्वारा विकसित ‘टाटा ड्यूरेका’ का उपयोग किया जा रहा है।
यह खास मटेरियल स्टील उत्पादन के दौरान निकलने वाले एलडी स्लैग को प्रोसेस कर बनाया जाता है, जो प्राकृतिक पत्थरों से भी ज्यादा मजबूत साबित होता है।
ड्यूरेका की प्रमुख खासियतें
* बेहतर मजबूती: कंक्रीट में अधिक कंप्रेसिव स्ट्रेंथ देता है
* पर्यावरण के अनुकूल: पहाड़ों के खनन की जरूरत घटाता है
* लागत में कमी: पारंपरिक एग्रीगेट से सस्ता विकल्प
* क्रैक-रेजिस्टेंट: निर्माण में दरारें आने की संभावना बेहद कम
अब तक इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 50 टन ड्यूरेका की सप्लाई की जा चुकी है। यह उपलब्धि जमशेदपुर और पूरे झारखंड के लिए गर्व की बात मानी जा रही है।

