Jamshedpur : पश्चिमी सिंहभूम के टोंटो प्रखंड में हाथी की संदिग्ध मौत और उसका दांत गायब होने का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है। वन विभाग ने इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच रिपोर्ट दिल्ली में वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCC) को सौंप दी है।
लहूलुहान शव और गायब दांत ने बढ़ाई शंका
दरअसल, यह मामला आरटीआई कार्यकर्ता कृतिवास मंडल की शिकायत के बाद तेज हुआ। बीते 28 जनवरी को टोंटो के बाईहातू और रोबकेड़ा गांव के बीच एक नर हाथी का शव बरामद हुआ था।शव पर कई चोटों के निशान थे और उसका दाहिना दांत गायब था, जिससे शिकार की आशंका गहरा गई।वन विभाग की रिपोर्ट में यह साफ किया गया है कि किसी अज्ञात शिकारी ने हाथी का दांत जबरन तोड़ा था। हालांकि सघन तलाशी अभियान चलाकर 31 जनवरी को घटनास्थल से करीब 500 मीटर दूर झाड़ियों से वह दांत बरामद कर लिया गया।
फॉरेंसिक जांच से खुलेगा मौत का सच
हाथी की मौत प्राकृतिक थी या शिकार का नतीजा। इसका खुलासा अब फॉरेंसिक जांच से होगा। इसके लिए विसरा और अन्य महत्वपूर्ण नमूने रांची में फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री (FSL) भेजे गए हैं।डीएफओ आदित्य नारायण के अनुसार, मामले में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी की उम्मीद है।
तकनीक के सहारे हाथियों की सुरक्षा
झारखंड-ओडिशा सीमा पर बढ़ते शिकार और मानव-हाथी संघर्ष को देखते हुए वन विभाग अब आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहा है।
* ‘हमार हाथी 2.0’ मोबाइल ऐप से हाथियों की लोकेशन ट्रैकिंग
* व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए त्वरित सूचना साझा
* क्विक रिस्पांस टीम (QRT) द्वारा नियमित गश्त
* भविष्य में थर्मल ड्रोन जैसे आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल की तैयारीवन विभाग का दावा है कि इन कदमों से हाथियों की सुरक्षा और निगरानी और मजबूत होगी

