RANCHI: झारखंड में कृषि व्यवस्था को अधिक मजबूत, संगठित और किसान-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) सभागार में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कृषि कार्यशाला का मंगलवार को समापन हुआ। इस दौरान कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम किसान तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों से किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया जाएगा।
जिलों को कंटिजेंसी प्लान तैयार करने का निर्देश
कृषि मंत्री ने कहा कि मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष एल-नीनो प्रभाव के कारण सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताई गई है। इसे देखते हुए सभी जिलों को आकस्मिक सुखाड़ योजना (कंटिजेंसी प्लान) तैयार करने का निर्देश दिया गया है। कार्यशाला के दौरान जिलों की ओर से प्रस्तुत ड्राफ्ट कंटिजेंसी प्लान पर चर्चा कर राज्य स्तरीय समेकित रणनीति तैयार की गई।
उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज, सिंचाई सुविधा, कृषि ऋण, उर्वरक और कीटनाशकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पंचायत स्तर तक किसानों की भागीदारी बढ़ाने, योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन तथा किसान उत्पादक संगठनों और स्वयं सहायता समूहों को कृषि योजनाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है।
स्वरोजगार योजनाओं को प्राथमिकता
कृषि मंत्री ने जानकारी दी कि इस वर्ष मधुमक्खी पालन, लाख उत्पादन, उद्यानिकी और कृषि आधारित स्वरोजगार योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। संबंधित विभागों को समयसीमा के भीतर कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान ही सरकार की सफलता का असली पैमाना है और खेती को लाभकारी, टिकाऊ व आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रमों के लिए विस्तृत कार्ययोजना तय
कार्यशाला के समापन के साथ आगामी कार्यक्रमों के लिए विस्तृत कार्ययोजना भी तय की गई है। 15 मई को जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित होगी, जिसमें खरीफ मौसम की तैयारियों और राज्य स्तरीय निर्देशों की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद 20 मई को जिला मुख्यालयों में वृहद खरीफ कार्यशाला आयोजित होगी, जहां कम से कम 500 प्रगतिशील किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। किसानों के लिए मृदा परीक्षण की विशेष व्यवस्था भी की जाएगी। 22 मई को सभी प्रखंड मुख्यालयों में प्रखंड स्तरीय खरीफ कार्यशालाएं आयोजित होंगी, जिनमें पंचायत स्तर के किसानों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को जोड़ा जाएगा।
बीज वितरण व्यवस्था में इस बार एफपीओ और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा पशुपालन विभाग को मई के अंत तक वैक्सीनेशन और दवाइयों की खरीद प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है। वहीं लंबित ट्रैक्टर और सोलर पंप वितरण को प्राथमिकता देने, तालाब निर्माण कार्य पूर्ण करने, मत्स्य बीज वितरण, डीप इरिगेशन और मल्चिंग लक्ष्य पूरे करने तथा उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने के लिए जिला स्तर पर टास्क फोर्स गठित करने का निर्णय लिया गया है।

