रांची : राज्य में ट्रैक्टर ट्रॉली के बढ़ते उपयोग और उससे जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए परिवहन विभाग ने अब इसके निर्माण और निबंधन प्रक्रिया को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। परिवहन सचिव राजीव रंजन ने सभी जिला परिवहन पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि केवल निर्धारित मानकों के अनुरूप बनी ट्रैक्टर ट्रॉलियों का ही निबंधन किया जाए।
दरअसल विभाग की समीक्षा में यह बात सामने आई है कि कई जगहों पर स्थानीय स्तर पर बिना किसी तकनीकी मानक और सुरक्षा व्यवस्था के ट्रॉलियां तैयार कर सड़कों पर उतार दी जाती हैं। इनमें ब्रेक, संकेतक लाइट, रिफ्लेक्टर, मजबूत चेसिस और संतुलित आकार जैसी जरूरी सुविधाओं का अभाव रहता है। ऐसे वाहनों से सड़क हादसों की आशंका बढ़ जाती है, खासकर रात के समय और ग्रामीण सड़कों पर। इसी को देखते हुए अब परिवहन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि ट्रैक्टर ट्रॉली का निर्माण तय मापदंडों और सुरक्षा मानकों के अनुसार ही करना होगा।
मानक को ले परिवहन विभाग सख्त
ट्रॉली की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई निर्धारित सीमा के भीतर होनी चाहिए। ट्रॉली में पीछे लाल रिफ्लेक्टर, संकेतक, मजबूत ब्रेक व्यवस्था तथा सुरक्षित जोड़ प्रणाली अनिवार्य होगी, ताकि सड़क पर चलने के दौरान वाहन असंतुलित न हो। अधिक भार ढोने के लिए अवैध रूप से ऊंचाई बढ़ाने या संरचना में बदलाव करने पर भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
परिवहन विभाग का मानना है कि खेती-किसानी और निर्माण कार्य में ट्रैक्टर ट्रॉली का उपयोग तेजी से बढ़ा है, लेकिन अधिकांश ट्रॉलियां बिना पंजीकरण और बिना सुरक्षा जांच के संचालित हो रही हैं। इससे दुर्घटना होने पर जिम्मेदारी तय करने में भी परेशानी आती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ट्रैक्टर ट्रॉली का रिकॉर्ड विभाग के पास उपलब्ध रहेगा और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित हो सकेगा।
सचिव राजीव रंजन ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि पहले से संचालित ट्रॉलियों की जांच कर उनमें आवश्यक सुधार करवाया जाए। मानक के अनुरूप नहीं पाई जाने वाली ट्रॉलियों को सुधार के बाद ही निबंधन देने को कहा गया है। विभाग का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा मजबूत करना और दुर्घटनाओं पर नियंत्रण लाना बताया गया है

