रांची: झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने सचिवालय सेवा संवर्ग समीक्षा समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। बुधवार को आयोजित समिति की दूसरी बैठक के बाद संघ की ओर से कहा गया कि समिति की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संचालित नहीं हो रही है। संघ ने बताया कि बैठक के दौरान कार्मिक सचिव की ओर से विभिन्न राज्यों में सचिवालय सेवाओं के पदों की स्थिति का विवरण प्राप्त करने का प्रस्ताव रखा गया। इस पर संघ की ओर से आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा गया कि राज्यकर्मियों को केंद्र सरकार के अनुरूप सेवा शर्त एवं संरचना देने पर सहमति बनी थी, न कि अन्य राज्यों के आधार पर तुलना कर सेवा संरचना तय करने पर।
संघ ने इसे मामले को लंबित रखने की कोशिश बताया
संघ के अध्यक्ष रितेश कुमार ने कहा कि संघ की ओर से समिति के समक्ष लिखित पक्ष भी प्रस्तुत किया गया, लेकिन इस विषय में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि समिति के कुछ सदस्य पहले अलग बैठक कर निर्णय लेते हैं और बाद में सचिवालय सेवा संघ के प्रतिनिधियों को बुलाकर केवल उन निर्णयों की जानकारी दी जाती है। संघ प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं मिल रहा है, जिससे समिति की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
रितेश कुमार ने यह भी कहा कि बैठक में राजस्व विभाग के नामित सचिव के स्थान पर दूसरे पदाधिकारी को शामिल होने की अनुमति दी गई, जबकि संघ के महासचिव के अस्पताल में भर्ती रहने के बावजूद उनके स्थान पर किसी अन्य प्रतिनिधि को शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई। इसे उन्होंने एकपक्षीय कार्यप्रणाली का उदाहरण बताया। संघ ने कहा है कि यदि समिति की कार्यप्रणाली में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो वह भविष्य में समिति की बैठकों में भागीदारी को लेकर अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर सकता है।
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