रांची/ चाईबासा : झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन ‘नवजीवन’ को बड़ी कामयाबी मिली है। महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक, झारखंड के निर्देशन में कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में सक्रिय भाकपा (माओवादी) के 25 शीर्ष कमांडर व दस्ता सदस्यों ने बुधवार को पुलिस मुख्यालय, रांची में आत्मसमर्पण कर दिया। वहीं गुमला जिले में सक्रिय जेजेएमपी के 2 कमांडरों ने भी हथियार डाल दिए।
16 हथियार और 2857 गोलियों के साथ सरेंडर
सरेंडर करने वाले माओवादियों में केंद्रीय कमेटी सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ सागर और असीम मंडल की टीम के शीर्ष कमांडर शामिल हैं। इनमें 6 स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर, 6 एरिया कमांडर और 13 दस्ता सदस्य हैं। सभी ने कुल 16 हथियार और 2857 राउंड गोलियों के साथ आत्मसमर्पण किया। जेजेएमपी के 2 सदस्यों ने एक हथियार और 130 गोलियां सौंपीं।
सभी स्थानीय निवासी, संगठन को करारा झटका
पुलिस के अनुसार, भाकपा (माओवादी) के सभी सरेंडर करने वाले सदस्य पश्चिमी सिंहभूम और गिरिडीह जिले के स्थानीय निवासी हैं। इन्हें संगठन ने पूर्व में दस्ते में शामिल किया था। इनके आत्मसमर्पण से पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, खूंटी, रांची और आसपास के जिलों में माओवादी गतिविधियों पर बड़ा अंकुश लगेगा। पुलिस इसे स्थानीय दस्ते के लिए करारा प्रहार मान रही है।
2026 में अबतक 44 गिरफ्तार, 29 सरेंडर, 22 ढेर
झारखंड पुलिस, केरिपु बल (कोबरा) और झारखंड जगुआर की संयुक्त कार्रवाई से नक्सली बैकफुट पर हैं। वर्ष 2026 में अबतक कुल 44 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया, 29 ने सरेंडर किया और पुलिस मुठभेड़ में 22 नक्सली मारे गए। पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में नक्सल गतिविधि पर रोक के लिए सारंडा क्षेत्र में 21 नए एडवांस कैंप लोकेशन और फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस स्थापित किए गए हैं।
तेलंगाना-बंगाल में भी कर रहे सरेंडर
झारखंड पुलिस के दबाव के कारण कई नक्सली तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में भी आत्मसमर्पण कर रहे हैं। संगठन के आंतरिक शोषण, भयादोहन और पुलिस की बढ़ती दबिश से परेशान होकर नक्सली मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
डीजीपी ने की अपील
झारखंड पुलिस ने शेष बचे माओवादियों से हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की है। पुलिस ने कहा कि झारखंड सरकार की ‘आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति’ का लाभ उठाएं। सरेंडर करने वालों को नीति के तहत सभी सुविधाएं दी जाएंगी।
डीजीपी ने कहा कि राज्य को नक्सल मुक्त बनाने के लिए अभियान जारी रहेगा। ऑपरेशन ‘नवजीवन’ से भटके हुए लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का काम तेजी से हो रहा है।

