RANCHI: झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक और विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में रिम्स-2 निर्माण परियोजना को लेकर एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) की टीम के साथ उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में प्रस्तावित परियोजना की रूपरेखा, वित्तीय प्रबंधन, निर्माण प्रक्रिया और अस्पताल की भविष्य की जरूरतों पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस दौरान बताया गया कि एडीबी की टीम फैक्ट फाइंडिंग मिशन के तहत रांची पहुंची है और वह रिम्स-2 परियोजना की तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियों का आकलन कर रही है। बैठक के दौरान अस्पताल की क्षमता, भवन संरचना, पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों, मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई।
राज्य में मिले बेहतर सुविधाएं
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि रिम्स-2 केवल एक अस्पताल नहीं होगा, बल्कि इसे अत्याधुनिक चिकित्सा, मेडिकल शिक्षा, रिसर्च और सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं से लैस एक समग्र स्वास्थ्य संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि झारखंड के लोगों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़े और उन्हें अपने ही राज्य में विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों। उन्होंने साफ किया कि रिम्स-2 का निर्माण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप किया जाएगा। अस्पताल का डिजाइन, तकनीकी व्यवस्था, मेडिकल सुविधाएं और कंसल्टेंसी पूरी तरह वर्ल्ड क्लास स्तर की होगी। साथ ही निर्माण कार्य में गुणवत्ता और समय सीमा का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
दो साल में पूरा करने का लक्ष्य
बैठक में जानकारी दी गई कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लागत लगभग 4200 करोड़ रुपये होगी, जिसमें से एशियन डेवलपमेंट बैंक करीब 2600 करोड़ रुपये का लोन उपलब्ध कराएगा। अधिकारियों ने बताया कि अगले छह महीनों में लोन प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताओं को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। इसके बाद दिसंबर 2026 या जनवरी 2027 से निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। सरकार की योजना है कि परियोजना का निर्माण दो वर्षों के भीतर पूरा कर लिया जाए ताकि जल्द से जल्द राज्यवासियों को इसका लाभ मिल सके। अपर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजना के हर चरण की गंभीरता से मॉनिटरिंग की जाए और किसी प्रकार की देरी न हो।
बैठक में अस्पताल को सेल्फ सस्टेनिंग मॉडल पर विकसित करने पर भी चर्चा हुई। इसके तहत अस्पताल की संचालन व्यवस्था को इस प्रकार तैयार करने की योजना है कि भविष्य में संस्थान आर्थिक रूप से मजबूत बना रहे और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार हो सके। बैठक में लोन रेडीनेस, कंसल्टेंट चयन, फंड फ्लो मैनेजमेंट, फाइनेंशियल सस्टेनेबिलिटी, एनवायरमेंटल सेफगार्ड, स्टाफिंग पैटर्न और तकनीकी विशेषज्ञों की नियुक्ति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग, जेएसबीसीसीएल और एडीबी के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

