RANCHI: झारखंड में बारिश और उमस भरी गर्मी के साथ ग्रामीण इलाकों में बढ़ते सर्पदंश मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने राज्यभर में विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश जारी किया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों को पत्र जारी कर भारत सरकार के नेशनल स्नेकबाइट मैनेजमेंट प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही राज्य में सर्पदंश और उससे होने वाली मौतों को अब अधिसूचित रोग (नोटिफाइड डिजीज) घोषित कर दिया गया है।
तेजी से बढ़ रहे स्नेकबाइट के मामले
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य में सर्पदंश के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2022 में जहां 392 मामले सामने आए थे, वहीं 2023 में यह संख्या बढ़कर 1647 हो गई, जिसमें 15 मौतें हुईं। 2024 में 2760 मामलों के साथ 22 लोगों की मौत हुई, जबकि 2025 में 4078 मामले और 26 मौतें दर्ज की गईं। चालू वर्ष 2026 में अप्रैल तक ही 561 मामले सामने आ चुके हैं।
सभी हॉस्पिटलों को देनी होगी रिपोर्ट
विभागीय समीक्षा में पाया गया है कि अधिकांश मौतें समय पर इलाज नहीं मिलने और जागरूकता की कमी के कारण हो रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग झाड़-फूंक, ओझा-गुनी और पारंपरिक उपचार पर भरोसा करते हैं, जिससे मरीज अस्पताल पहुंचने में देर कर देते हैं। इसी को देखते हुए अब सरकारी, निजी, कॉर्पोरेट, रेलवे, सेना, आयुष अस्पतालों सहित सभी स्वास्थ्य संस्थानों के लिए सर्पदंश के पुष्ट या संदिग्ध मामलों की रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी गई है। प्रत्येक माह की 5 और 20 तारीख तक रिपोर्ट सिविल सर्जन को भेजनी होगी।
एंटी स्नेक वेनम रखने का निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों में एंटी स्नेक वेनम (ASV) की शत-प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह जीवनरक्षक इंजेक्शन सभी सरकारी अस्पतालों में पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध रहेगा। स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है और गांव स्तर पर एएनएम, सहिया और एमपीडब्ल्यू के जरिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड में पाई जाने वाली 250 से अधिक प्रजातियों में से केवल लगभग 25 प्रतिशत सांप ही विषैले होते हैं। कई बार अत्यधिक डर और घबराहट भी जानलेवा साबित होती है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें, जहर चूसने या चीरा लगाने की कोशिश न करें और तुरंत मरीज को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाएं। आपात स्थिति में 108 एम्बुलेंस सेवा, स्वास्थ्य हेल्पलाइन 104 और आयुष्मान भारत जानकारी के लिए 14555 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है।

