रांची : झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अनिरुद्ध पांडे ने कहा कि राज्यभर के मनरेगा कर्मी अपनी लंबित और न्यायोचित मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं तथा किसी भी प्रकार के दबाव में आकर हड़ताल समाप्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि कर्मियों का आंदोलन सरकार या प्रशासन के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और सम्मानजनक सेवा शर्तों के लिए है। जब तक मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने बताया कि विभिन्न जिलों में उपायुक्तों द्वारा मनरेगा कर्मियों को कार्य पर लौटने के लिए नोटिस और निर्देश जारी किए गए हैं। इसके जवाब में संघ की जिला इकाइयों ने संबंधित उपायुक्तों को ज्ञापन सौंपकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। ज्ञापनों में कहा गया है कि मनरेगा कर्मी हमेशा ग्रामीण विकास योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं, लेकिन वर्तमान मानदेय और सेवा शर्तों के कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है।
संघ की प्रमुख मांगों में ग्रेड-पे आधारित मानदेय, स्थायी समायोजन, सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था, मृत मनरेगा कर्मियों के आश्रितों को मुआवजा एवं अनुकंपा के आधार पर नौकरी तथा लंबित मानदेय का भुगतान शामिल है। संघ का कहना है कि वर्ष 2024 के आंदोलन के बाद सरकार और कर्मचारी संघ के बीच हुए लिखित समझौते को अब तक लागू नहीं किया गया, जिसके कारण कर्मियों में असंतोष बढ़ा है।
मनरेगा कर्मियों का आरोप है कि राज्य के कई जिलों में महीनों से मानदेय बकाया है। ऐसे में समस्याओं के समाधान और बकाया भुगतान पर पहल करने के बजाय कर्मियों पर आंदोलन समाप्त करने का दबाव बनाया जा रहा है। संघ का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान संवाद और वार्ता से होना चाहिए।
अनिरुद्ध पांडे ने बताया कि आंदोलन के अगले चरण के तहत मंगलवार से ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह के पैतृक आवास, महागामा में पांच दिवसीय धरना शुरू किया गया है। इस धरने में राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे मनरेगा कर्मी शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि महागामा के अलावा अन्य जिलों में भी धरना-प्रदर्शन और आंदोलनात्मक कार्यक्रम जारी हैं।
संघ के नेताओं ने कहा कि सरकार यदि कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर वार्ता की पहल करती है तो समाधान का रास्ता निकल सकता है। फिलहाल राज्यभर के मनरेगा कर्मियों ने एकजुट होकर आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है और मांगों के समाधान तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया है।

