चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के गोइलकेरा प्रखंड अंतर्गत बिला पंचायत में जल जीवन मिशन के तहत संचालित 58.25 करोड़ रुपये की जलापूर्ति (जल-नल) योजना को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। पंचायत के सैकड़ों ग्रामीणों ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (पीएचईडी) चक्रधरपुर के कार्यपालक अभियंता को आवेदन सौंपकर योजना की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। इस दौरान ग्रामीणों ने एक रैली निकालकर पीएचडी कार्यालय पहुंचकर धरना प्रदर्शन किया। ग्रामीण ने पोस्टर पर जल नल योजना में भ्रष्टाचार का आरोप भी लगाया। अधिकांश महिला माथे पर डेगची लेकर पहुंचे थीं।
आठ वर्ष बीत जाने के बावजूद जल जीवन मिशन योजना आज भी अधूरी
ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन मिशन के तहत प्रत्येक घर तक स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की गई थी, लेकिन 8 वर्ष बीत जाने के बावजूद योजना आज भी अधूरी पड़ी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार विभागीय अभिलेखों में योजना की कुल स्वीकृत राशि 58.25 करोड़ रुपये में से लगभग 57.92 करोड़ रुपये की निकासी दर्शाई गई है, जबकि जमीनी स्तर पर कार्य पूरी तरह से संपन्न नहीं हुआ है और किसी भी गांव में नियमित पेयजल आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है।
अधूरी पाइपलाइन और बंद पड़ी योजनाएं
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत के कई गांवों में पाइपलाइन बिछाने का कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है। जहां पाइपलाइन बिछाई गई है, वहां सड़क और जमीन की मरम्मत तक नहीं की गई है। कई स्थानों पर जलमीनार एवं अन्य आवश्यक संरचनाओं का निर्माण भी अधूरा है। परिणामस्वरूप पंचायत के हजारों लोग आज भी पेयजल के लिए कुएं, चापाकल और अन्य पारंपरिक स्रोतों पर निर्भर रहने को विवश हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जब योजना की लगभग पूरी राशि खर्च हो चुकी है, तब भी लोगों को इसका लाभ नहीं मिलना गंभीर चिंता का विषय है। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग और कार्य में अनियमितता की आशंका भी पैदा हो रही है।
ग्रामीणों ने रखी 10 प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने अपने आवेदन में योजना की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, 57.92 करोड़ रुपये की निकासी के बावजूद कार्य अधूरा रहने के कारणों की जांच करने, सभी वित्तीय एवं तकनीकी अभिलेखों का सार्वजनिक ऑडिट कराने तथा दोषी अधिकारियों, अभियंताओं, संवेदकों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने, इसके अलावा अधूरे कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने, प्रत्येक गांव में नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने, योजना की प्रगति एवं खर्च का विवरण पंचायत भवन में सार्वजनिक करने, जांच अवधि में विशेष निगरानी टीम गठित करने, पंचायतवासियों को यह स्पष्ट जानकारी देने कि उन्हें योजना का पानी कब तक मिलेगा तथा जलमीनार निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि का उचित मुआवजा देने की मांग भी की गई है।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी विभाग और प्रशासन की होगी। इस संबंध में ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए आवेदन पर बिला पंचायत के दर्जनों ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं। ग्रामीणों को अब विभागीय जांच और प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है, ताकि करोड़ों रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ आम लोगों तक पहुंच सके।
मौके पर रहें मौजूद
इस मौके पर रामलाल लागुरी, वीरेंद्र बोयपाई, अनंद लागुरी, सेलाई लागुरी, बलराम सिंह, अर्जुन सिंह लागुरी, गंगाराम लागुरी, बुधराम बोयपाई, सुखदेव बोयपाई, मानसिंह हेंब्रम, कृष्णा पूर्ति, सोमनाथ कालुंडिया, बबलू कालुंडिया, वीर सिंह गागराई, विक्रम नाग, मोहन सिंह मारला, तरकांत हेंब्रम समेत पुर पंचायत के महिला-पुरुष एवं ग्रामीण मौजूद थे।
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