चाईबासा : विश्व बाल श्रम दिवस के अवसर पर पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन ने बाल श्रम उन्मूलन एवं जन जागरूकता अभियान की शुरुआत की। जिला समाहरणालय परिसर से दो जागरूकता वाहनों को रवाना किया गया।
डीसी ने दिखाई हरी झंडी
उपायुक्त मनीष कुमार, उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार तथा अपर उपायुक्त किस्टो कुमार बेसरा ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर वाहनों को जिले के विभिन्न क्षेत्रों के लिए रवाना किया। ये वाहन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भ्रमण कर बाल श्रम के दुष्प्रभाव, बच्चों के शिक्षा व संरक्षण के अधिकार और बाल श्रम निषेध संबंधी कानूनी प्रावधानों की जानकारी आमजन तक पहुंचाएंगे।
बाल श्रम एक सामाजिक अपराध: डीसी
उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि बाल श्रम एक सामाजिक अपराध है। इसके उन्मूलन में समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। जिला प्रशासन बाल श्रम की रोकथाम और प्रभावित बच्चों के पुनर्वास के लिए निरंतर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि बाल श्रम मुक्त समाज के लिए जागरूकता, सतर्कता और सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
पहले गांव, फिर पंचायत को बनाएं बाल श्रम मुक्त
डीसी ने कहा कि जिला प्रशासन की प्राथमिकता बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक वातावरण देना है। उन्होंने नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और संबंधित विभागों से अपील की कि बाल श्रम की किसी भी घटना की सूचना प्रशासन को दें। उन्होंने कहा कि हम सभी पहले बाल श्रम मुक्त गांव, फिर बाल श्रम मुक्त पंचायत और अंत में बाल श्रम मुक्त जिला बनाने की दिशा में संगठित प्रयास करेंगे।
सभी नागरिकों से सक्रिय योगदान देने का किया आह्वान
इस मौके पर जिला भू अर्जन पदाधिकारी, नजारत उप समाहर्ता, स्थापना उप समाहर्ता, सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा कोषांग, श्रम अधीक्षक, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी सहित अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से बच्चों के अधिकारों की रक्षा और बाल श्रम उन्मूलन के लिए सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

