
Ranchi : झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की हार के बाद पार्टी के भीतर आत्ममंथन का दौर शुरू हो गया है। हार के कारणों को लेकर कांग्रेस के अंदर ही कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं और अब सवाल अपने ही नेताओं की भूमिका पर उठने लगे हैं। पार्टी नेतृत्व पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर केंद्रीय आलाकमान को सौंपने की तैयारी में है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कुछ समय पहले बिहार विधान परिषद चुनाव के दौरान कांग्रेस विधायकों द्वारा राजद प्रत्याशी का समर्थन नहीं किए जाने का असर अब झारखंड के राज्यसभा चुनाव में देखने को मिला। हालांकि कांग्रेस की ओर से आधिकारिक रूप से इस तरह का कोई आरोप नहीं लगाया गया है, लेकिन पार्टी के कई नेता निजी तौर पर इस संभावना से इनकार भी नहीं कर रहे हैं।
कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि चुनाव के दौरान पार्टी के प्रभारी और वरिष्ठ नेता सहयोगी दल झामुमो को साधने में व्यस्त रहे, जबकि भीतर ही भीतर दूसरी रणनीति पर काम चल रहा था। उनका कहना है कि वास्तविक राजनीतिक गतिविधियों को समय रहते समझने में पार्टी के रणनीतिकार विफल रहे।
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश कांग्रेस प्रभारी और अन्य वरिष्ठ नेता जल्द ही केंद्रीय नेतृत्व को हार के कारणों पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपेंगे। माना जा रहा है कि अगले एक-दो दिनों में पूरे मामले की जानकारी दिल्ली तक पहुंचा दी जाएगी।
पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग या अंदरूनी असंतोष की आशंका को समय रहते नहीं भांपा जा सका। कई नेताओं का कहना है कि पूरी प्रक्रिया इतनी गोपनीय तरीके से संचालित की गई कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को भी इसकी भनक नहीं लग सकी।
इस बीच कांग्रेस के एक वर्ग का मानना है कि गठबंधन की राजनीति पर भी नए सिरे से विचार करने की जरूरत है। नेताओं का तर्क है कि झामुमो और कांग्रेस के पास विधानसभा में बहुमत के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है और उन्हें अन्य सहयोगियों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि राष्ट्रीय नेतृत्व फिलहाल गठबंधन को बनाए रखने के पक्ष में है और किसी छोटी राजनीतिक खटास को बड़ा मुद्दा बनाकर विपक्षी एकजुटता को कमजोर नहीं करना चाहता।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान जल्द ही झारखंड के राजनीतिक घटनाक्रम की समीक्षा करेगा और हार के कारणों के साथ-साथ भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा करेगा।

