Home » Jharkhand Bureaucracy : नौकरशाही : बगल वाला ‘बंगला’

Jharkhand Bureaucracy : नौकरशाही : बगल वाला ‘बंगला’

Jharkhand Bureaucracy : वनांचल के नौकरशाही वाले मुहल्ले में इन दिनों चर्चा एक बड़े ओहदे को लेकर है। नजरें इस बात की ओर टिकी हैं कि कौन काबिज होगा? हाथ-पैर तो कई लोग मार रहे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उसकी है, जो रेस में सबसे आगे हैं। मामला अंतिम दौर में है। लिहाजा मुकाबले का रोमांच चरम पर है। आखिर क्या चल रहा है अंदरखाने, जानें द फोटोन न्यूज के एक्जीक्यूटिव एडिटर की कलम से।

by Dr. Brajesh Mishra
Jharkhand Bureaucracy
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

Jharkhand Bureaucracy :  गुरु नवासे को भूगोल समझा रहे थे। हिंद महासागर और ‘प्रशांत’ महासागर का फर्क बता रहे थे। बच्चा मानने को तैयार नहीं। जिद पर अड़ा था। पहले दिखाओ, फिर बताओ। गुरु बड़े धर्मसंकट में थे। एक तरफ बाल मन का हठ, दूसरी तरफ काम का दबाव। जैसे-तैसे मोबाइल थमा कर राहत की सांस ली। वादा किया कि अगली छुट्टी में समुद्र दिखाने ले चलेंगे। आश्वासन पाकर बच्चे ने मां की ओर रुख किया। सामने नजर पड़ते ही गुरु मुखातिब हुए। पूछा- और महोदय क्या खबर है? गुरु का सवाल खुद में जवाब समेटे रहता। बस नतमस्तक होने की देर थी। कहा- गुरु खबर की तलाश में ही आए हैं।

Read Also- Jharkhand Bureaucracy :  नौकरशाही : झरोखे पर झांप

उत्तर सुनकर गुरु के चेहरे पर मुस्कान तैर गई। बोले- चलो आपकी तलाश भी पूरी किए देते हैं। गुरु के इस कथन ने बेचैन मन को एकाग्र कर दिया। इंद्रियां सचेत हो गईं। गुरु ने बोलना शुरू किया। कहा- खबर यह है कि मुहल्ले में बड़ी हलचल है। लंबे इंतजार के बाद कुछ बड़े घरानों को आशियाना बदलना है। पुराने घरों में दूसरे किराएदार शिफ्ट होने हैं। सबसे बड़ी दावेदारी ‘हुकूम’ के बगल वाली ‘हवेली’ पर है। कंपटीशन कड़ा है। दावा है कि ‘बंगले’ के पांच दावेदार हैं। जैसे समुद्र में सबसे बड़ा नाम ‘प्रशांत’ महासागर का है।

Read Also- Jharkhand Bureaucracy :  नौकरशाही : फोटो वाली फ्रेमिंग

ठीक वैसे ही दावेदारों की रेस में सबसे आगे वही हैं। मामला बस एक बात पर फंस रहा है कि मकान अकेले आवंटित किया जाए या…? मुहल्ले में दूध-सब्जी पहुंचाने वाले नई खबर सुना रहे। ‘हुकूम’ को कुछ नजदीकी लोगों ने सुझाव दे दिया है। बगल के बंगले में एक दीवार डाल दें। एक ही मकान में एक साथ दो किराएदार एडजस्ट हो जाएंगे। आखिर इतने बड़े आवास का किसी को एकाधिकार देना ठीक नहीं। पूर्व के अनुभव को बतौर नजीर पेश किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि आखिरी फैसला किचेन कैबिनेट में होना है।

Read Also-Jharkhand Bureaucracy : नौकरशाही : विभागीय सीढ़ी का सहारा

फिलहाल मामला मजबूत दावेदारी तक ही है। गुरु ने बात-बात में बड़ी बात बता दी थी। बाकी चार दावेदारों के नाम सामने आते और कहानी पूरी हो जाती। लिहाजा, बगैर देर किए अगला सवाल फेंक दिया। गुरु बाकी कौन हैं? प्रश्न सुनते ही गुरु की त्योरियां चढ़ गईं। कुछ झल्लाते हुए बोले- पत्रकार महोदय, सूचना उतनी ही लीजिए, जिससे नौकरी चल जाए। दूसरे के कमरे में इतना क्यों घुसना कि आरोप चोरी तक पहुंच जाए? गुरु की बात से एक बात साफ हो गई कि यह कहानी अधूरी ही पूरी थी। हो सकता है कि बाकी के चार दावेदार गुरु के करीबी हों।

Read Also- Jharkhand Bureaucracy : नौकरशाही : सुरंग की तलाश

Related Articles

Leave a Comment