
चाईबासा : लोग यही कहते हुए सुने जा रहे थे कि भगवान ऐसा दिन किसी को न दिखाए। हालांकि किसी की लाचारी में समाज के लोगों का सहयोग का संबल मिल जाए तो ऊपरवाले की कृपा ही मानी जाती है। पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुवा बाजार से इंसानियत की मिसाल पेश करनेवाली एक मर्मस्पर्शी घटना सामने आई है। गुवा सेल (SAIL) अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ने वाली एक गरीब मजदूर की पत्नी का अंतिम संस्कार स्थानीय मुखिया और युवाओं ने मिलकर कराया।
ठीक नहीं है पति की मानसिक स्थिति
मृतका के पति की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। इस कारण पूरे परिवार के सामने लाचारी की स्थिति थी। ऐसे समय में जनप्रतिनिधि और समाजसेवियों ने आगे बढ़कर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाई। एकजुट होकर सभी ने अंतिम संस्कार में योगदान किया।
10 दिनों से अस्पताल में भर्ती थी महिला
गुवा बाजार में बोझा ढोकर किसी तरह अपने परिवार का पेट पालने वाले एक स्थानीय मजदूर की पत्नी पिछले 10 दिनों से बीमार थी। उसे इलाज के लिए गुवा सेल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ सोमवार देर शाम उसकी मौत हो गई। महिला की मौत के बाद अस्पताल में एक हृदयविदारक स्थिति पैदा हो गई। मृतका का पति मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण शव का अंतिम संस्कार करने की स्थिति में बिल्कुल नहीं था।
सूचना मिलने पर मुखिया ने की पहल
महिला के शव को लावारिस हालत में पड़ा देख अस्पताल के कर्मचारियों ने इसकी सूचना स्थानीय लोगों को दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए गुवा पश्चिमी पंचायत की मुखिया पद्मिनी लागुरी तुरंत अस्पताल पहुँचीं। परिवार की बेबसी को भांपते हुए उन्होंने बिना देर किए स्थानीय समाजसेवी युवकों को एकजुट किया।
बेबस और असहाय का सहयोग सभी का कर्तव्य : मुखिया
गुवा पश्चिमी पंचायत मुखिया पद्मिनी लागुरी ने कहा है कि समाज में जब भी कोई बेबस और असहाय स्थिति में हो, तो हम सभी का कर्तव्य है कि राजनीति से ऊपर उठकर एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आएँ। यही हमारी असली संस्कृति है।”
युवाओं ने चंदा जुटाकर निभाई शवयात्रा की जिम्मेदारी
मुखिया के नेतृत्व में स्थानीय युवाओं ने तुरंत आपस में चंदा जुटाकर कफन-दफन और अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था की। इसके बाद शव को सम्मानपूर्वक अस्पताल से लाकर पूरे रीति-रिवाज के साथ उसका अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया। इस मानवीय कार्य में मुखिया पद्मिनी लागुरी के साथ मुख्य रूप से समाजसेवी दीनबंधु भंज, सोनू महापात्र, सोनाराम बालमुचू, राहुल पान, करण लोहार, करण होरों, राजेश दास और भारत पान सहित कई स्थानीय युवा मुस्तैद रहे। इन सभी ने मिलकर शवयात्रा निकाली और मुखाग्नि से लेकर अंतिम क्रियाकर्म तक की जिम्मेदारी निभाई।
इलाके में हो रही सराहना
संकट की इस घड़ी में असहाय परिवार का संबल बनने के लिए स्थानीय ग्रामीणों ने मुखिया और युवाओं की इस पहल की जमकर सराहना की है। लोगों का कहना है कि आज के दौर में जहाँ लोग अपनों से मुंह मोड़ लेते हैं, वैसे में इन युवाओं और जनप्रतिनिधि ने न केवल एक महिला को सम्मानजनक विदाई दी, बल्कि समाज में एकजुटता और सेवाभाव की एक अनूठी मिसाल भी पेश की है।

