
देवघर : भगवान भोलेनाथ को देवताओं में सबसे निराला कहा जाता है। लेकिन उनके भक्त भी कम निराले नहीं हैं। उनके अलग अलग अंदाज लोगों को अपनी ओर खींच रहा है। पटना से 500 श्रद्धालुओं की टोली 54 फीट लंबा कांवर लेकर बाबा के दरबार देवघर पहुंची है। रास्ते में उन्हें देखने वालों की भीड़ उमड़ी रही।
सावन के पावन महीने में देवघर की सड़कों पर भक्ति का एक अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। पटना से आया कांवरियों का एक जत्था अपने साथ 54 फीट लंबा विशाल कांवर लेकर बाबा बैद्यनाथ के दरबार पहुंचा। पटना सिटी के मारूफगंज बाजार से आए करीब 500 श्रद्धालुओं की इस टोली को देखने के लिए रास्ते भर लोगों का तांता लगा रहा।
18 साल से कायम है अनोखी परंपरा
इस विशेष यात्रा की अगुवाई कर रहे रोशन कुमार ने बताया कि उनके मोहल्ले के युवा वर्ष 2008 से लगातार यह अनूठी परंपरा निभाते आ रहे हैं। इस विशालकाय कांवर की खासियत और इसकी पूरी यात्रा की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
भव्य सजावट: 54 फीट के कांवर में भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं, जिन्हें आकर्षक रूप देने के लिए चांदी की छोटी-छोटी मूर्तियों से सजाया जाता है।
पूरे देश में खुशहाली के लिए प्रार्थना
सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल भरकर शिवभक्त पैदल ही 105 किलोमीटर की कठिन दूरी महज दो दिनों में तय कर देवघर पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं के अनुसार, वे यह कठिन यात्रा केवल अपनी व्यक्तिगत मन्नतों के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश में सुख, शांति और खुशहाली की प्रार्थना लेकर करते हैं।
’हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंजा मंदिर परिसर
देवघर पहुंचने पर स्थानीय लोगों और अन्य श्रद्धालुओं के बीच इस अनोखे कांवर को देखने की भारी उत्सुकता नजर आई। बोल बम और जय बाबा भोलेनाथ के गूंजते जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक किया और अगले वर्ष फिर इसी उत्साह के साथ आने का संकल्प लेकर वापस लौट गए।

