
रांची : झारखंड की बहुचर्चित जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों की परतें अब धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। मामले की छानबीन कर रही सीआईडी की विशेष जांच टीम का शिकंजा परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी आईसीएन पर पूरी तरह कस गया है। पुलिस हिरासत में लिए गए एजेंसी के दो कर्मचारियों सोमांश प्रकाश और राहुल से लगातार दूसरे दिन गहन पूछताछ की गई।
पूछताछ के दौरान सीआईडी ने परीक्षा के तौर-तरीकों के साथ-साथ एजेंसी के मुख्य संचालक मिथिलेश सिंह और उनके बिहार स्थित संभावित ठिकानों के बारे में अहम सुराग जुटाए हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों आरोपियों को वापस जेल भेज दिया गया है। गौरतलब है कि रोहतास के रहने वाले सोमांश और वैशाली के राहुल को सीआईडी ने हाल ही में दिल्ली से गिरफ्तार किया था।
500 से अधिक पास हुए छात्रों के दर्ज हुए बयान
दूसरी तरफ, सीआईडी का ध्यान परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों पर भी है। जांच टीम अब तक करीब 500 सफल अभ्यर्थियों के बयान कलमबंद कर चुकी है। मंगलवार को भी 35 अभ्यर्थियों से लंबी पूछताछ हुई। अफसरों ने छात्रों से फॉर्म भरने से लेकर, परीक्षा केंद्र तक पहुंचने और परिणाम आने तक का पूरा ब्योरा मांगा।
जांच एजेंसी खास तौर पर यह पता लगाने में जुटी है कि अभ्यर्थियों को किसी लीक या सेटिंग की जानकारी थी या नहीं। जिन परीक्षार्थियों की भूमिका पर थोड़ा भी संदेह है, उनके दस्तावेजों की गहराई से स्क्रूटनी की जा रही है।
कड़ी से कड़ी जोड़ रही सीआईडी
शुरुआती जांच में सामने आया है कि जेएसएससी ने परीक्षा का जिम्मा ‘वेबेल टेक्नोलॉजी’ को दिया था, जिसने बाद में काम मिथिलेश सिंह की आईसीएन एजेंसी को सौंप दिया। अब सीआईडी इस पूरी चेन और गिरफ्तार कर्मचारियों से मिले इनपुट के आधार पर मास्टरमाइंड मिथिलेश सिंह तक पहुंचने की तैयारी में है।
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