
रांची : खरीफ विपणन मौसम 2026-27 में सरकारी स्तर पर धान बेचने के इच्छुक किसानों के लिए ई-केवाईसी और भूमि सत्यापन अनिवार्य किया गया है। किसानों को यह प्रक्रिया 15 नवंबर 2026 तक पूरी करानी होगी। जिन किसानों का ई-केवाईसी और संबंधित जमीन का सत्यापन पूरा नहीं होगा, उनसे सरकारी केंद्रों पर धान की खरीद नहीं की जाएगी। खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने सभी जिलों को किसानों का सत्यापन समय पर पूरा कराने और इसकी जानकारी किसानों तक पहुंचाने का निर्देश दिया है। विभाग की ओर से अब तक 1,59,226 किसानों को 2,84,740 बार एसएमएस भेजे जा चुके हैं।
विभागीय जानकारी के अनुसार किसानों को ई-केवाईसी और भूमि सत्यापन के लिए अपने निकटतम लैम्प्स/ पैक्स, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी या जिला आपूर्ति पदाधिकारी से संपर्क करना होगा। सत्यापन की प्रक्रिया का उद्देश्य सरकारी खरीद में वास्तविक किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करना है, ताकि जमीन और किसान के रिकॉर्ड का मिलान होने के बाद ही धान की खरीद की जा सके।
धान खरीद का लक्ष्य और राज्य का प्रस्ताव अलग
इस खरीफ मौसम में धान खरीद को लेकर लक्ष्य के स्तर पर राज्य और केंद्र के आंकड़े अलग हैं। राज्य सरकार ने केंद्र को करीब 4.08 लाख टन धान खरीद का प्रस्ताव भेजा था। यह प्रस्ताव करीब 2.77 लाख टन चावल तैयार करने की जरूरत को ध्यान में रखकर दिया गया था। इसके मुकाबले केंद्र स्तर पर झारखंड के लिए 1.96 लाख टन धान खरीद का अनुमानित लक्ष्य तय किया गया है। यानी राज्य जितनी मात्रा में धान खरीदना चाहता था, केंद्रीय लक्ष्य उससे कम है।
इस अंतर को इस तरह समझा जा सकता है कि 4.08 लाख टन राज्य का प्रस्तावित खरीद अनुमान था, जबकि 1.96 लाख टन केंद्र की ओर से तय खरीद लक्ष्य है। इसलिए 1.96 लाख टन को राज्य की कुल धान उत्पादन क्षमता या किसानों की पूरी उपज का लक्ष्य नहीं माना जाना चाहिए। यह सरकारी खरीद के लिए निर्धारित मात्रा है।
खरीफ विपणन मौसम 2026-27 में सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,441 रुपये प्रति क्विंटल है।
जिलों को सत्यापन तेज करने का निर्देश
धान खरीद शुरू होने से पहले किसानों का रिकॉर्ड दुरुस्त करने पर विभाग का जोर है। जिलों को निर्देश दिया गया है कि किसानों को समय रहते ई-केवाईसी और भूमि सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने की जानकारी दी जाए। किसानों को भी अंतिम समय का इंतजार नहीं करने को कहा गया है, ताकि खरीद के समय सत्यापन लंबित रहने के कारण उन्हें परेशानी नहीं हो।
रोपनी की स्थिति
31 अगस्त तक राज्य में धान की रोपनी 18.01 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 15.57 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। यानी लक्ष्य का करीब 87 फीसदी रकबा कवर हो गया था। ऐसे में अब धान की फसल तैयार होने के साथ सरकारी खरीद की प्रक्रिया के लिए किसानों का रिकॉर्ड सत्यापित करने पर जोर दिया जा रहा है। झात हो कि गत वर्ष 15 दिसंबर से धान की खरीद शुरू हुई थी, जबकि इस बार धान खरीद की तिथि घोषित नहीं की गई है।
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