
चाईबासा : कोल्हान विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को अब नए प्रारूप में डिग्री प्रमाणपत्र मिलने की तैयारी है। विश्वविद्यालय प्रशासन प्रमाणपत्र को आधुनिक सुरक्षा तकनीकों से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। नए प्रमाणपत्र में क्यूआर कोड और बारकोड सहित कुल 11 सुरक्षा विशेषताएं शामिल की जाएंगी। इसका उद्देश्य प्रमाणपत्र की वास्तविकता की जांच को आसान बनाना और डिजिटल माध्यम से उसके सत्यापन की सुविधा उपलब्ध कराना है। नया डिग्री प्रमाणपत्र ए4 आकार में जारी किए जाने की तैयारी है। कागज का वास्तविक आकार 210 × 297 मिलीमीटर (21 × 29.7 सेंटीमीटर या 8.3 × 11.7 इंच) होता है।
नए प्रारूप को विश्वविद्यालय की 45वीं अकादमिक काउंसिल की बैठक में मंजूरी दी गई। झारखंड स्टेट यूनिवर्सिटी एक्ट, 2026 के प्रावधानों के तहत पुनर्गठित अकादमिक काउंसिल की यह पहली बैठक शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो. डॉ. अंजिला गुप्ता ने की। कुलसचिव डॉ. अमर कुमार ने बैठक का संचालन किया, जबकि डीन अकादमिक्स डॉ. संजय यादव ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
डिजिटल सत्यापन से आसान होगी प्रमाणपत्र की जांच
नए डिग्री प्रमाणपत्र में शामिल क्यूआर कोड के माध्यम से विद्यार्थी के प्रमाणपत्र से संबंधित जानकारी का डिजिटल सत्यापन किया जा सकेगा। किसी नौकरी, उच्च शिक्षा संस्थान या अन्य जगह दस्तावेजों की जांच के दौरान प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता पता करने में यह व्यवस्था उपयोगी होगी। डिजिटल मंच पर दस्तावेज जमा करने के दौरान भी प्रमाणपत्र का सत्यापन आसान बनाने की तैयारी है।
बारकोड और अन्य सुरक्षा विशेषताओं के साथ प्रमाणपत्र तैयार किए जाने से उसकी सुरक्षा बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। विश्वविद्यालय की ओर से प्रमाणपत्र को इस तरह तैयार करने की योजना है, जिससे उसके वास्तविक होने की जांच पारंपरिक तरीके के साथ डिजिटल माध्यम से भी की जा सके।
रोजगार के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने पर जोर
अकादमिक काउंसिल की बैठक में केवल प्रमाणपत्र की सुरक्षा से जुड़े विषयों पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि विद्यार्थियों को रोजगार के लिए अधिक तैयार करने पर भी जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम को वर्तमान समय की आवश्यकताओं और उद्योगों की मांग के अनुरूप विकसित करने की जरूरत बताई।
बैठक में विद्यार्थियों को नए कौशल से जोड़ने, शोध को प्रोत्साहित करने और नवाचार को बढ़ावा देने के विषय पर भी विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों का कहना था कि विद्यार्थियों को ऐसे कौशल उपलब्ध कराए जाने चाहिए, जिनके आधार पर वे स्थानीय स्तर के साथ राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध रोजगार के अवसरों के लिए भी स्वयं को तैयार कर सकें। इसके लिए उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल को महत्वपूर्ण बताया गया।
एक वर्षीय पीजी और पीएचडी कार्यक्रम पर भी चर्चा
अकादमिक काउंसिल की बैठक में एक वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रम के साथ शोध और पीएचडी पाठ्यक्रमों को नियमित करने के प्रस्ताव पर भी मंथन किया गया। इसके अलावा शैक्षणिक कैलेंडर 2026-27 सहित कई महत्वपूर्ण अकादमिक प्रस्ताव बैठक में रखे गए।
विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र को नियमित और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से शैक्षणिक कैलेंडर 2026-27 को मंजूरी दी गई। इससे विभिन्न अकादमिक गतिविधियों को निर्धारित समय के अनुसार संचालित करने की दिशा में व्यवस्था तैयार होगी।
आईआईटी और एनआईटी के साथ शैक्षणिक सहयोग की तैयारी
विद्यार्थियों को देश के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों से जोड़ने के लिए आईआईटी, एनआईटी और अन्य संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन करने की संभावनाओं पर भी बैठक में चर्चा हुई। प्रस्तावित सहयोग के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए शोध, प्रशिक्षण और इंटर्नशिप के अवसर बढ़ाने के साथ अकादमिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
बैठक में आईआईटी खड़गपुर के प्रो. संजीव श्रीवास्तव, सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एमपी सिन्हा, केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के प्रो. भगवान सिंह, ट्रिपल आईटी रांची के निदेशक प्रो. राजीव श्रीवास्तव और एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने अपने सुझाव रखे। प्रो. राजीव श्रीवास्तव और प्रो. गौतम सूत्रधार बैठक में ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए।

