
रांची: हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में बंद महिला से कथित कस्टोडियल रेप और बरी होने के बावजूद हिरासत में रखे जाने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अखिल कुमार की खंडपीठ ने गृह सचिव को 5 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है।
सामाजिक कार्यकर्ता अपूर्व विवेक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में कहा गया है कि रीना देवी को आपराधिक मामले (G.R. Case No. 1647/2025) में बरी किए जाने के बाद भी डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता उज्जैनी चटर्जी ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिस कांस्टेबल रंजीत महतो ने 2020 से 2022 के बीच महिला का लगातार यौन शोषण और दुष्कर्म किया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल किया कि बरी होने के बाद किस कानूनी अधिकार के तहत महिला को हिरासत में रखा गया है। पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से कानून के वैध प्राधिकार के बिना वंचित नहीं किया जा सकता।
DLSA ने शुरू की जांच
हाईकोर्ट के निर्देश पर झालसा के सदस्य सचिव ने DLSA हजारीबाग की टीम को डिटेंशन सेंटर भेजकर महिला का बयान दर्ज कराया। जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करने का निर्देश दिया गया है। हजारीबाग एसपी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश होकर आरोपी कांस्टेबल के खिलाफ जांच और महिला की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम का आश्वासन दिया।
अदालत में आईजी (जेल) भी मौजूद रहे। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी। उस दिन गृह सचिव की व्यक्तिगत उपस्थिति के साथ DLSA और हजारीबाग एसपी की जांच रिपोर्ट भी पेश की जाएगी।

