
रांची : झारखंड में अभियोजन निदेशालय से जुड़े कानूनी प्रावधानों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 के अनुरूप कर दिया गया है। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। इसके तहत अभियोजन निदेशालय के गठन और निदेशक व उप निदेशकों की शक्तियों एवं कर्तव्यों से संबंधित पुराने कानूनी संदर्भों को बदलकर बीएनएसएस की संबंधित धाराओं से जोड़ा गया है।
अधिसूचना के अनुसार, अभियोजन निदेशालय के गठन से संबंधित प्रावधान में दंड प्रक्रिया संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2005 की धारा 25-ए के स्थान पर बीएनएसएस की धारा 20(1)(क) को प्रतिस्थापित किया गया है। इसी तरह, निदेशक और उप निदेशकों की शक्तियों एवं कर्तव्यों से संबंधित अधिसूचना में धारा 25-ए की उपधारा (7) के स्थान पर बीएनएसएस की धारा 20(11) लागू की गई है। अभियोजन निदेशालय आपराधिक मामलों में सरकारी पक्ष की पैरवी और अभियोजन प्रक्रिया की निगरानी से जुड़ा महत्वपूर्ण संस्थान है। बीएनएसएस की धारा 20 के तहत निदेशालय की संरचना और अधिकारियों की जिम्मेदारियां निर्धारित हैं। इसके दायरे में गंभीर मामलों में अभियोजन की प्रगति, सुनवाई और अपील से जुड़े विषयों की निगरानी भी शामिल है। कानूनी प्रावधानों को नई संहिता के अनुरूप करने से संबंधित प्रशासनिक और कानूनी संदर्भों में एकरूपता आएगी।
2008 में हुआ था निदेशालय का गठन
झारखंड में अभियोजन निदेशालय का गठन वर्ष 2008 में किया गया था। निदेशक का एक और उप निदेशक के तीन पद सृजित हैं। अधिकारियों की नियुक्ति और सेवा शर्तों के लिए वर्ष 2011 में नियमावली बनाई गई थी, जिसमें 2015 में संशोधन हुआ। वहीं, निदेशक और उप निदेशकों की शक्तियों एवं कर्तव्यों को लेकर वर्ष 2021 में अधिसूचना जारी की गई थी।
वर्तमान अधिसूचना में कानूनी प्रावधानों को बीएनएसएस के अनुरूप किया गया है। इसमें नए पदों के सृजन, नई नियुक्तियों या अधिकारियों की शक्तियों में अलग से बढ़ोतरी का उल्लेख नहीं है। सरकार ने संशोधन के अलावा अन्य प्रावधानों को यथावत रखा है।

