समस्तीपुर: जन सुराज पदयात्रा के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने कहा कि रूलिंग पार्टी JDU के अध्यक्ष ललन सिंह ने ये बयान दिया था कि बिहार के जितने पत्रकार सरकार के खिलाफ लिख रहे हैं ये शराब माफिया से जुड़े लोग हैं। क्या बिहार के पत्रकार ऐसे हैं? JDU के अध्यक्ष ऐसा इसलिए बोल रहे हैं, क्योंकि उनके अंदर अहंकार आ गया है। JDU के नेताओं के अंदर इतना अहंकार आता कहां से है। लोकतंत्र में इतना अहंकार इन नेताओं के अंदर तब आता है जब उन्हें ये एहसास हो जाये कि हमारी कुर्सी जा नहीं सकती।
प्रशांत किशोर ने कहा कि पत्रकारों की हालत बिहार में वो है कि आप सबका दुख लिख सकते हैं अपना दुख छोड़कर। आज पत्रकारों की जो दुर्दशा है बिहार में वो कुछ ज्यादा ही है। हम यहां एक साल से बिहार में घूम रहे हैं और पत्रकारों से मिल रहे हैं। उनकी परेशानियों को सुनने के लिए बिहार सरकार के पास न टाइम है और न ही उनके लिए योजनाएं हैं। इनका सिर्फ दमन किया जा रहा है। सरकार द्वारा दबाने का काम किया जा रहा है।
नीतीश कुमार की कुर्सी खिसक जायेगी, पता भी नहीं चलेगा :
नीतीश कुमार ने कहीं न कहीं ये सोच लिया है, समझ लिया है और 2015 के बाद जो घटना हुई है, नीतीश कुमार ने देखा कि जनता चाहे किसी को वोट दे, घुमा-फिराकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ही बनना है। इस बार नीतीश कुमार की अंतिम पारी चल रही है, जितने महीने बचे हैं वो जोड़ लें इसके बाद कोई गणित नहीं चलने वाला है।

