
चाईबासा : विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर सोमवार को पश्चिमी सिंहभूम जिले के सदर अस्पताल चाईबासा से एक भव्य जागरूकता रैली निकाली गई। इस रैली का मुख्य उद्देश्य आम जनता को रेबीज की रोकथाम, जानवरों से होने वाली बीमारियों से बचाव और कुत्ता काटने की स्थिति में तुरंत इलाज कराने के प्रति जागरूक करना था।
जागरूकता रैली को सिविल सर्जन डॉ. मीना कलुंडिया, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. शिवचरण हांसदा, जिला कुष्ठ निवारण पदाधिकारी डॉ. मीनू कुमारी और राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी सह जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. जगन्नाथ हेम्ब्रम ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
साबुन और बहते पानी से घाव धोने की सलाह
रैली के माध्यम से लोगों को जानकारी दी गई कि यदि किसी व्यक्ति को कुत्ता या अन्य संक्रमित जानवर काट ले, तो घबराने की जगह तुरंत घाव को साबुन और साफ बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना समय गंवाए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर डॉक्टर की सलाह लें और अनिवार्य रूप से रेबीज का टीका लगवाएं।
स्वास्थ्य कर्मियों ने ली रेबीज मुक्ति की शपथ
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित स्वास्थ्य अधिकारियों और प्रतिभागियों ने रेबीज जागरूकता की शपथ ली। सभी ने संकल्प लिया कि वे समाज में रेबीज के प्रति जागरूकता फैलाएंगे, कुत्ता या पशु काटने पर प्राथमिक उपचार की सही जानकारी देंगे और लोगों को झाड़-फूंक तथा अंधविश्वास जैसी हानिकारक पद्धतियों से दूर रखकर समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए प्रेरित करेंगे।
लापरवाही से बचें, रेबीज 100% रोकी जा सकने वाली बीमारी
अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि रेबीज एक बेहद खतरनाक और जानलेवा बीमारी है, लेकिन सही समय पर सही कदम उठाकर इसे पूरी तरह से रोका जा सकता है। जानवरों के काटने या खरोंच मारने पर किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है। तुरंत घाव की सफाई और समय पर टीकाकरण ही इससे बचाव का एकमात्र उपाय है।
स्वास्थ्य विभाग की अपील
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे स्वयं जागरूक बनें और अपने परिवार व आसपास के लोगों को भी रेबीज से बचाव, प्राथमिक उपचार और एंटी-रेबीज वैक्सीन के महत्व के बारे में बताएं। इसके साथ ही बेजुबान जानवरों के प्रति दयालु व्यवहार रखने और पशुओं से फैलने वाले रोगों के नियंत्रण में सहयोग करने का आग्रह किया गया।

