
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर नगर के थाना रोड स्थित गायत्री कुंज में भगेरिया परिवार की ओर से सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। बुधवार को कथा के चौथे दिन वृंदावन से पधारे श्रद्धेय आचार्य हिमांशु जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर किया। कथा का शुभारंभ गुरु वंदना के साथ हुआ।
कथा के दौरान आचार्य हिमांशु जी महाराज ने कहा कि परमात्मा ही परम सत्य है। जब हमारी वृत्ति परमात्मा में लग जाती है, तो संसार का अस्तित्व स्वतः ही गायब हो जाता है। उन्होंने कहा कि सवाल उठता है कि यदि परमात्मा संसार में ही घुले-मिले हैं, तो संसार के नष्ट होने पर परमात्मा का नाश क्यों नहीं होता।
इसका उत्तर देते हुए महाराज जी ने समझाया कि भगवान संसार से जुड़े हुए भी हैं और अलग भी हैं। जैसे आकाश में बादल रहता है और बादल के भीतर भी आकाश तत्व मौजूद रहता है। बादल के गायब हो जाने पर भी आकाश समाप्त नहीं होता। उसी प्रकार संसार के मिट जाने पर भी परमात्मा का अस्तित्व बना रहता है। संसार की कोई भी वस्तु भगवान से अलग नहीं है।
कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोपियों के घरों में माखन चोरी की लीला का आध्यात्मिक रहस्य भी बताया। उन्होंने कहा कि दूध का सार माखन होता है। श्रीकृष्ण ने गोपियों के घरों से केवल माखन चुराया, इसका अर्थ है कि उन्होंने सार तत्व को ग्रहण किया और असर को छोड़ दिया।
प्रभु यह संदेश देना चाहते हैं कि इस सृष्टि का सार तत्व परमात्मा है, इसलिए असार यानी संसार के नश्वर भोग-पदार्थों को प्राप्त करने में अपना समय व्यर्थ नहीं करना चाहिए। वास्तविकता में श्रीकृष्ण केवल ग्वाल-बालों के सखा ही नहीं थे, बल्कि उन्हें दीक्षित करने वाले जगद्गुरु भी थे, जिन्होंने उनकी आत्मा को जागृत किया और आत्मिक स्तर पर रहकर सुंदर जीवन जीने का मार्ग दिखाया।इस अवसर पर भगेरिया परिवार के सदस्यों के अलावा बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए उपस्थित थे।

