
Jamshedpur : शहर और आसपास लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं को लेकर जिला प्रशासन ने गंभीरता दिखाई है। हादसों के कारणों की समीक्षा और दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से धालभूम अनुमंडल पदाधिकारी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई।बैठक में ट्रैफिक विभाग के अधिकारियों के साथ बस एसोसिएशन, ट्रक एसोसिएशन और सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधि शामिल हुए। अधिकारियों ने हाल के सड़क हादसों की समीक्षा करते हुए दुर्घटना संभावित स्थानों और उनके कारणों पर चर्चा की।
हफ्ते भर में शुरू हो जाएगा ब्लैक स्पॉट चिन्हित करने का काम
बैठक में शहर और आसपास के ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर वहां सुधारात्मक कार्य कराने पर विशेष जोर दिया गया। ब्लैक स्पाॅट चिन्हित करने का काम एक हफ्ते में शुरू हो जाएगा। ऐसा भरोसा दिलाया गया है। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने, वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने और सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति वाहन चालकों को जागरूक करने पर भी रणनीति बनाई गई। प्रशासन ने कहा कि सड़क सुरक्षा के लिए सरकारी विभागों के साथ वाहन चालकों और आम लोगों की सहभागिता भी जरूरी है। चालकों से निर्धारित गति सीमा का पालन करने और सड़क पर सावधानी बरतने की अपील की गई।
साल 2016 में भी शुरू हुआ था अभियान
गौरतलब है कि सड़कों के ब्लैक स्पाॅट चिन्हित करने का काम 10 साल पहले साल 2016 में भी शुरू हुआ था। शहर के कई स्पॉट चिन्हित हुए थे। इन्हें पथ निर्माण विभाग को ठीक करना था। मगर, आज तक इसे ठीक नहीं किया गया। बस हर महीने मीटिंग होती रही। धरातल पर कुछ काम नहीं हुआ। यही वजह है कि समस्या जस का तस बनी हुई है। एक आंकड़े के अनुसार जमशेदपुर में प्रतिदिन एक-दो जानें हादसों में जा रही हैं।
और गायब हो गई स्पीड लिमिट योजना
इसके अलावा, सड़क हादसे रोकने के लिए स्पीड लिमिट योजना लाई गई थी। इसके तहत विभिन्न सड़कों पर स्पीड लिमिट तय कर दी गई थी। यह लिमिट 40 किमी प्रति घंटा से 60 किमी प्रति घंटा तक थी। इसके लिए बोर्ड भी बना दिए गए थे। बोर्ड लगने शुरू भी हो गए थे। मगर, इसी बीच तत्कालीन ट्रैफिक डीएसपी का ट्रांसफर हो गया। इसके बाद जो नए डीएसपी ट्रैफिक आए उन्होंने इसकी फाइल ही गायब कर दी। जब भी उनसे पूछा जाता कि स्पीड लिमिट योजना का काम कब आगे बढ़ेगा तो वह जवाब देते कौन सी स्पीड लिमिट योजना। ऐसी कोई योजना संज्ञान में नहीं है। तत्कालीन डीएसपी ने बताया कि उनके दफ्तर में ऐसी फाइल है ही नहीं। जबकि, सच्चाई यह थी कि इस फाइल पर जिला प्रशासन ने कई मीटिंग की थी। डीसी ऑफिस सभागार में मीटिंग के बाद इसका खाका सभी नगर निकायों को भेजा गया था। वहां से मंजूरी के बाद इसे लागू करने की कवायद शुरू हुई थी।
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