पटना। बिहार में इस साल जितिया पर्व के दौरान जलाशयों में आस्था की डुबकी हादसे में बदल गई। सरकार ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि ‘जीवितपुत्रिका’ (जितिया) त्योहार के दौरान राज्य के अलग-अलग में नदियों और तालाबों में पवित्र स्नान करते समय 37 बच्चों सहित कम से कम 43 लोग डूब गए और तीन लापता होने की खबर आयी है।
मृतकों में कैमूर के आठ, सारण के छह, सीवान के पांच, पश्चिमी और पूर्वी मित्तल के दो-दो और पटना का एक बच्चा शामिल है। इसके अलावा भागलपुर और पटना में तीन-तीन, सुपौल में दो और गुपचुप, बांका, स्कायर और मध्य विद्यालय में एक-एक व्यक्ति की डूबने से मौत हो गई।
इन जिलों में भी डूबने की हुई घटनाएं
बुधवार को इस त्योहार के दौरान राज्य के 15 जिलों पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, नालंदा, औरंगाबाद, कैमूर, बक्सर, सीवान, रोहतास, सारण, पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, गोपालगंज और अरवल जिलों से डूबने की घटनाएं सामने आईं है। कितने लोगों की मौत हुई है, अभी ये आंकड़े कन्फर्म नहीं हैं।
4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा
डीएसएस्टर प्रबंधन विभाग (DMD) द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, “आगे की तलाशी अभियान जारी है”। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस दुखद घटना में शोक संवेदना व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों के लिए 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा भी की है।
जीवित्पुत्रिका व्रत कब और किसके लिए रखा जाता है
जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला एक वार्षिक व्रत है। यह परंपरा बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में विशेष रूप से लोकप्रिय है। यह व्रत माताएं अपने बच्चों की सुरक्षा और लंबी आयु के लिए रखती हैं। इस साल यह व्रत 25 सितंबर को मनाया गया था। त्यौहार के दौरान यह घटना तब हुई जब बच्चे अपनी माताओं के साथ विभिन्न जलाशयों में डुबकी लगाने गए थे।

