RANCHI: राज्य के सबसे बड़े एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में कुछ सालों पहले सरसो की ब्रीड तैयार की गई थी। जिसकी उत्पादकता तो अधिक है ही। उससे तेल भी सामान्य की तुलना में अधिक निकल रहा है। अब इस सरसो की डिमांड पड़ोसी राज्यों में हो रही है। इतना ही नहीं इस सरसो से अब बीज भी तैयार किए जा रहे है जो सीधे किसानों को भेजे जा रहे है। जिससे कि उपज बढ़ाकर उनकी आमदनी बढ़ाई जा सके। फिलहाल ओड़िशा स्टेट सीड कार्पोरेशन ने बीएयू से बीज की सप्लाई कराई है। इससे पहले छत्तीसगढ़ में भी किसानों को बीज की सप्लाई की गई है। जहां पर उत्पादन दोगुना पहुंच गया है।
बीएयू ने किया है विकसित
साइंटिस्ट डॉ अरुण कुमार ने बताया कि बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के मस्टर्ड डिपार्टमेंट ने 2021 में बिरसा भाभा मस्टर्ड तैयार किया था। 2021 में झारखंड राज्य से इसे रिलीज किया गया। वहीं जनवरी 2022 कृषि मंत्रालय से इस सीड को नोटिफाई किया गया। इसके बाद इसे मार्केट में उतारा गया। ये सीड पहले बीएयू के सेंटर में लगाए गए। इसके बाद आसपास के इलाके में किसानों को भी दिए गए। आज इस सीड की डिमांड इतनी बढ़ गई है कि जिसके लिए पर्याप्त बीज ही उपलब्ध हो पा रहा है। अब नेशनल सीड कार्पोरेशन को ब्रीडिंग सीड दिए गए है। जिससे सर्टिफाइड सीड तैयार कर मार्केट में सप्लाई किए जाएंगे। इसके लिए लोगों को थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा।
नार्थ इस्ट के स्टेट में भी एक्सटेंशन
अरुण कुमार ने बताया कि 19 अप्रैल 2025 को कृषि मंत्रालय भारत सरकार में एक बैठक हुई। जिसमें इस सरसो के बारे में फीडबैक मिला। ये वैरायटी सिर्फ झारखंड ही नहीं बिहार, बंगाल, ओड़िशा, छत्तीसगढ़ नार्थ इस्टर्न स्टेट के सेवेन सिस्टर्स के राज्यों में इसके एक्सटेंशन प्रोग्राम के लिए रिकमेंड किया गया। भारत सरकार ने पिछले साल 4.3 क्विंटल सीड प्रोडक्शन का लक्ष्य दिया था। आज स्थिति ये है कि हमारे पास थोड़ा भी सीड नहीं बचा है। किसान विकास केंद्र, बीएयू और नेशनल सीड कार्पोरेशन ने भी ब्रीडर सीड लिया है। ओड़िशा स्टेट सीड कार्पोरेशन को भी सीड की सप्लाई की गई है।
छत्तीसगढ़ में रिकार्ड तोड़ उत्पादन
झारखंड में सामान्य तौर पर एक हेक्टेयर में सरसो का उत्पादन साढ़े 8 क्विंटल के आसपास है। लेकिन बिरसा भाभा सीड से 15-16 क्विंटल का उत्पादन हो रहा है। लेकिन इसकी जेनेटिक क्षमता 28-30 क्विंटल तक है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि छत्तीसगढ़ में 28 क्विंटल प्रति हेक्टेयर में उत्पादन हो रहा है। इसकी रिपोर्ट भी बीएयू को भेजी गई है। जिससे साफ है कि अच्छा खेत और माहौल मिले तो झारखंड में इसका उत्पादन दोगुना तक पहुंच जाएगा।
जल्दी तैयार हो जाती है फसल
बिरसा भाभा मस्टर्ड 1 की वैरायटी काफी अच्छी है। जिसमें तेल की मात्रा 39-41 परसेंट है। एक किलो सरसो में 400 ग्राम तेल निकल रहा है। इसके फसल की बात करे तो यह रोपनी के बाद 112 से 115 दिन में फसल पककर तैयार हो जाती है। जिससे कि किसानों को बड़ी राहत मिल रही है।
लेट्स आन सीड में मिली सफलता
अरुण कुमार ने बताया कि हमलोग अब सरसो की नई वैरायटी पर काम कर रहे है। भरतपुर से एक सीड मंगाया गया है। ये वैसे किसानों के लिए है जो धान काटने के बाद सरसो लगाते है। हालांकि इसकी प्रोडक्शन कम है। लेकिन यह भी जल्दी तैयार हो जाएगा। बिरसा सरसो भरत-1 के नाम से ये बीज बाजार में आएगा। फिलहाल झारखंड सरकार के पास इसे भेजा जाएगा। वहां से रिलीज होने के बाद इसे सेंट्रल में भेजा जाएगा। इससे किसानों को बड़ी राहत मिल सकेगी। चूंकि धान काटने के बाद लंबे समय तक खेत खाली रह जाते थे। इससे किसानों को तिलहन वाली फसल लगाने का आप्शन मिलेगा।
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