
मुंबई : बंबई उच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित पुलिसकर्मी शंभाजी पाटिल की गिरफ्तारी को अवैध करार दिया है और महाराष्ट्र सरकार को उसे दो लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। पाटिल को हत्या के एक मामले में सबूतों को नष्ट करने और झूठी रिपोर्ट तैयार करने के आरोप में मार्च 2013 में गिरफ्तार किया गया था, हालांकि एक दिन बाद उन्हें जमानत मिल गई थी।
गिरफ्तारी के खिलाफ पाटिल का मामला
पाटिल ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि सतारा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक द्वारा उनकी गिरफ्तारी अवैध थी और यह उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन था। उन्होंने 10 लाख रुपये के मुआवजे की भी मांग की थी। पाटिल का आरोप था कि हत्या के मामले में उनकी जांच त्रुटिपूर्ण थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।
न्यायालय का आदेश
बंबई उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एएस चंदुरकर और न्यायमूर्ति राजेश पाटिल की खंडपीठ ने सोमवार को अपने आदेश में कहा कि गिरफ्तारी के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और इसे अनावश्यक रूप से अंजाम दिया गया। अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी में कोई विशेष आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि यह मामला जमानत योग्य था।
राष्ट्रपति पदक से सम्मानित पाटिल
पाटिल को जनवरी 2004 में राष्ट्रपति पुलिस पदक और पुलिस महानिदेशक के प्रतीक चिन्ह से सम्मानित किया गया था। अदालत ने कहा कि पाटिल को उनकी सेवा के लिए सम्मानित किया गया था और अब उन्हें अवैध गिरफ्तारी के कारण मुआवजा दिया जाना चाहिए। अदालत ने सरकार को आठ हफ्ते के भीतर मुआवजे की राशि प्रदान करने का निर्देश दिया और कहा कि सरकार को लापरवाही से गिरफ्तारी करने वाले अधिकारियों से राशि वसूलने का अधिकार है।
पाटिल की गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि
पाटिल 2009 में सतारा जिले के कराड शहर पुलिस थाने के प्रभारी थे, जब उन्होंने हत्या के मामले की जांच की थी। इसके बाद उनका तबादला हो गया और मामला दूसरे अधिकारी को सौंप दिया गया। 2012 में, सतारा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने पाटिल को मामले में की गई जांच की प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया। इसके बाद मार्च 2013 में पाटिल को गिरफ्तार किया गया, लेकिन अगले दिन उन्हें जमानत मिल गई थी।

