
जमशेदपुर : माइग्रेन केवल सामान्य सिरदर्द नहीं है। इसमें सिर के एक हिस्से में तेज या धड़कता हुआ दर्द, मितली तथा रोशनी, आवाज और गंध के प्रति संवेदनशीलता जैसी परेशानियां हो सकती हैं। कुछ लोगों में खान-पान की खास चीजें माइग्रेन को ट्रिगर कर सकती हैं। हालांकि इसके कारण और ट्रिगर प्रत्येक व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की डाइटीशियन अन्नू सिन्हा के अनुसार, माइग्रेन से परेशान लोगों को अपने भोजन और लक्षणों के बीच संबंध पर ध्यान देना चाहिए। बिना वजह बहुत-सी चीजें बंद करने के बजाय यह पहचानना जरूरी है कि समस्या वास्तव में किस खाद्य पदार्थ के सेवन के बाद बढ़ती है।
प्रोसेस्ड मीट और पुरानी चीज से सावधानी
सॉसेज, सलामी, बेकन और हैम जैसे प्रोसेस्ड मीट में नाइट्रेट और नाइट्राइट पाए जा सकते हैं। संवेदनशील लोगों में इनके सेवन के बाद सिरदर्द शुरू हो सकता है। इसी प्रकार चेडर, परमेसन और ब्लू चीज जैसी लंबे समय तक रखी गई चीज में मौजूद टायरामाइन कुछ लोगों के लिए माइग्रेन का कारण बन सकता है।
चॉकलेट और कैफीन का असर
चॉकलेट को माइग्रेन का संभावित ट्रिगर माना जाता है, लेकिन हर व्यक्ति पर इसका प्रभाव समान नहीं होता। कुछ मामलों में माइग्रेन शुरू होने से पहले ही चॉकलेट खाने की इच्छा बढ़ सकती है। वहीं, थोड़ी मात्रा में कैफीन सिरदर्द से राहत दे सकता है, लेकिन अधिक सेवन या इसे अचानक बंद करने से माइग्रेन उभर सकता है। इसलिए चाय-कॉफी की मात्रा नियमित और सीमित रखें।
इन चीजों से भी बढ़ सकती है परेशानी
शराब, विशेषकर रेड वाइन, कुछ लोगों में माइग्रेन बढ़ा सकती है। इसके अतिरिक्त अधिक प्रोसेस्ड या रेस्टोरेंट के भोजन में मौजूद मोनोसोडियम ग्लूटामेट यानी MSG भी संवेदनशील लोगों को प्रभावित कर सकता है। एस्पार्टेम जैसे आर्टिफिशियल स्वीटनर, अचार, फर्मेंटेड खाद्य पदार्थ, स्मोक्ड फूड और ज्यादा प्रिजर्वेटिव वाले पैकेटबंद उत्पाद भी संभावित ट्रिगर हो सकते हैं।
केवल भोजन ही जिम्मेदार नहीं
डाइटीशियन अन्नू सिन्हा बताती हैं कि माइग्रेन का संबंध सिर्फ खाने से नहीं होता। लंबे समय तक भूखे रहना, पर्याप्त पानी न पीना, नींद की कमी, तनाव, हार्मोनल बदलाव और स्क्रीन पर अधिक समय बिताना भी इसकी आशंका बढ़ा सकता है। नियमित अंतराल पर संतुलित भोजन करें और शरीर को हाइड्रेट रखें।
फूड डायरी से पहचानें अपना ट्रिगर
कुछ सप्ताह तक फूड डायरी बनाना लाभकारी हो सकता है। उसमें भोजन, पानी, नींद, तनाव और सिरदर्द शुरू होने का समय लिखें। इससे व्यक्तिगत पैटर्न समझने में मदद मिलेगी। यदि सिरदर्द बार-बार हो, अचानक बहुत गंभीर लगे या उसके साथ कमजोरी, भ्रम, बोलने अथवा देखने में परेशानी हो, तो स्वयं उपचार करने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।

