
चाईबासा : पश्चिम सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर थाना क्षेत्र से अंधविश्वास और उससे उपजे विवाद का एक गंभीर मामला सामने आया है। चंद्री पंचायत के पनसुवां गांव में 24 वर्षीय महिला करिश्मा राय की मौत के बाद दो परिवारों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। मृतका के मायके वालों ने ससुराल पक्ष पर बीमार होने पर दवा की जगह डायन-बिसाही के शक में झाड़-फूंक कराने और समय पर सही इलाज न दिलाने का आरोप लगाया है। जबकि ससुराल पक्ष इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहा है।
प्रेम विवाह के बाद बेंगलुरु में रहता था दंपती
जानकारी के मुताबिक पनसुवां गांव निवासी देवानंद प्रधान और करिश्मा राय ने करीब तीन साल पहले प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद दोनों अपनी आजीविका के लिए बेंगलुरु चले गए थे, जहां वे मजदूरी करते थे। दंपती की एक तीन महीने की मासूम बेटी भी है। हाल ही में वे गांव लौटे थे।

बीमार होने पर दवा की जगह झाड़-फूंक के चक्कर में गई जान
मृतका के चाचा कमल राय का आरोप है कि करिश्मा की तबीयत खराब होने के बाद ससुराल वालों ने डॉक्टरों के पास ले जाने के बजाय अंधविश्वास का रास्ता चुना। उसे डायन-बिसाही के संदेह में ओझा-गुनी के पास ले जाकर झाड़-फूंक कराया गया। जब करिश्मा की हालत बेहद नाजुक हो गई, तब जाकर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। मायके वालों का कहना है कि अगर समय रहते उसे सही इलाज मिलता, तो उसकी जान बच सकती थी।
ससुराल पक्ष ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
दूसरी तरफ देवानंद के पिता निर्मल प्रधान ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह गलत और निराधार बताया है। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि परिवार ने करिश्मा के इलाज में कोई कोताही नहीं बरती। उनके पास जितने भी संसाधन उपलब्ध थे, उनके जरिए बहू का बेहतर इलाज कराने की कोशिश की थी।
चक्रधरपुर पुलिस ने कहा कि मामले की सूचना मिलते ही पुलिस टीम गांव में स्थिति पर नजर रखे हुए है ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे। मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी। निष्पक्ष जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

