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West singhbhum news : करोड़ों खर्च, फिर भी बेकार पड़े अस्पतालों के ईटीपी, कई केंद्रों में प्रसव कक्ष तक नहीं जुड़ा कनेक्शन

14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में लगाए गए अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र चालू नहीं, खुले में पड़े उपकरणों में लग रही जंग, सिविल सर्जन ने 24 घंटे में मांगी रिपोर्ट

by Hari Shankar Gope
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चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के सरकारी अस्पतालों में पर्यावरण संरक्षण और बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के लिए लगाए गए अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (ईटीपी) करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अब तक उद्देश्य पूरा नहीं कर पा रहे हैं। सदर अस्पताल समेत जिले के 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में करीब 10 से 12 लाख रुपये की लागत से ईटीपी लगाए गए, लेकिन एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अधिकांश संयंत्र चालू नहीं हो सके हैं।

 

खुले आसमान के नीचे पड़े इन संयंत्रों के महंगे उपकरण जंग खा रहे

अस्पताल परिसरों में खुले आसमान के नीचे पड़े इन संयंत्रों के महंगे उपकरण जंग खा रहे हैं। जिस उद्देश्य से इन्हें स्थापित किया गया था, वह अब तक पूरा होता नहीं दिख रहा है। स्थिति और भी गंभीर तांतनगर एवं मंझारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में है। यहां ईटीपी तो लगा दिए गए, लेकिन प्रसव कक्ष (मेटरनिटी वार्ड) से संयंत्र का कनेक्शन ही नहीं किया गया। ऐसे में प्रसव कक्ष से निकलने वाले सबसे अधिक संक्रमित तरल अपशिष्ट का उपचार नहीं हो पा रहा है। केवल पैथोलॉजी लैब से निकलने वाले दूषित पानी का कनेक्शन ईटीपी से जोड़ा गया है। जबकि अस्पतालों में सबसे अधिक जैविक एवं संक्रमित तरल कचरा प्रसव कक्ष से ही निकलता है। इससे स्पष्ट है कि ईटीपी स्थापित करने वाली एजेंसी ने योजना के क्रियान्वयन में गंभीर लापरवाही बरती।

दूषित पानी को पर्यावरण में छोड़ने से पहले ईटीपी के माध्यम से शुद्ध करना अनिवार्य

अस्पतालों से निकलने वाले तरल अपशिष्ट में बैक्टीरिया, वायरस और अन्य संक्रमणकारी तत्व मौजूद रहते हैं। बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के तहत लैब, ओपीडी, सामान्य वार्ड और प्रसव कक्ष से निकलने वाले दूषित पानी को पर्यावरण में छोड़ने से पहले ईटीपी के माध्यम से शुद्ध करना अनिवार्य है। लेकिन जिले के कई अस्पतालों में यह व्यवस्था कागजों तक सीमित नजर आ रही है।

इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी ने बताया कि मामले की जानकारी उन्हें है। इसकी जांच के लिए टीम गठित की गई है, हालांकि अब तक जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि संबंधित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि ईटीपी को जिस उद्देश्य से लगाया गया है, उसे हर हाल में पूरा कराया जाएगा।

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