
जामताड़ा : ससुराल वाले फूले नहीं समा रहे थे कि उनके दामाद बाबू बंगाल से जामताड़ा आकर लॉ की पढ़ाई कर रहे हैं। उम्मीद लगाए बैठे थे कि जमाई राजा एक दिन बड़े वकील बनकर कोर्ट में बहस करेंगे और परिवार का नाम रोशन करेंगे। लेकिन किसे पता था कि कानून की किताबें पढ़ने आए दामाद जी पीठ पीछे साइबर ठगी का काला धंधा चला रहे हैं।
झारखंड के जामताड़ा में पुलिस ने जब साइबर अपराधियों के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया, तो पूरी कहानी का खुलासा हुआ। पुलिस ने कुल 9 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें यह अनोखे जमाई राजा भी शामिल हैं।
ससुराल में रहकर सीखे ठगी के गुर
पकड़े गए आरोपियों में एक युवक अमृत रुईदास है, जो पश्चिम बंगाल के कुल्टी (बराकर) का रहने वाला है। अमृत अपनी ससुराल में रहकर वकालत की पढ़ाई कर रहा था। ससुराल वाले उसकी पढ़ाई-लिखाई देखकर खुश थे, लेकिन अमृत चुपके से जामताड़ा के शातिर साइबर ठगों के संपर्क में आ गया। वकालत की पढ़ाई की आड़ में उसने लोगों को चूना लगाने का धंधा शुरू कर दिया। अब वह कोर्ट में वकालत करने के बजाय पुलिस की हवालात में अपने किए की सफाई दे रहा है।
झाड़ियों में चल रहा था फ्रॉड गेम
जामताड़ा के एसपी शंभु कुमार सिंह को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ ठग जंगलों और झाड़ियों में छिपकर लोगों को फोन कर रहे हैं। इसके बाद साइबर डीएसपी अमित कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई। पुलिस ने करमाटांड़ और जामताड़ा थाना क्षेत्र के सियाटांड़, मट्टांड़ और पोसोई मार्ग के पास झाड़ीनुमा इलाकों में अचानक छापेमारी की। पुलिस को देखते ही ठगों में हड़कंप मच गया, लेकिन पुलिस ने घेराबंदी करक मौके से ही 9 ठगों को रंगे हाथों दबोच लिया।
पकड़े गए आरोपियों में अमृत रुईदास के अलावा मुजाहिद अंसारी, मट्टांड़ निवासी मुजाहिद अंसारी, सलामत अंसारी, सनवर अंसारी, तबारक अंसारी और सरफराज अंसारी, पोसोई निवासी रोक्की कुमार दास, अर्जुन दास, सचिन दास तथा पश्चिम बंगाल के कुल्टी थाना क्षेत्र के दासपाड़ा शामिल हैं।
पुलिस पूछताछ में बताए तरीके
पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की तो आरोपियों ने बताया कि वे फोनपे कैशबैक का फर्जी संदेश भेजकर लोगों को लिंक एक्सेप्ट करने के लिए प्रेरित करते थे। जैसे ही पीड़ित लिंक स्वीकार करता, उसके खाते से रकम ठगों के फर्जी एप्लिकेशन में स्थानांतरित हो जाती थी।
गूगल पर फर्जी कस्टमर केयर नंबर अपलोड कर लोगों को अपने जाल में फंसाता था। आरोपी खुद को बैंक अधिकारी बताकर एटीएम कार्ड का 16 अंकों वाला नंबर, सीवीवी और ओटीपी हासिल कर फर्जी बैंक खातों एवं विभिन्न वॉलेट के माध्यम से रुपये निकाल लेते थे।

