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Forts Of Jharkhand : झारखंड के रहस्यमयी किले; जंगलों में दफ्न इतिहास की गौरवगाथा

Ranchi: झारखंड के जंगलों, पहाड़ियों और नदियों के बीच आज भी इतिहास सांस लेता है। यहां के प्राचीन किले सिर्फ पत्थरों की इमारतें नहीं, बल्कि नागवंशी, चेरो और रक्सेल राजवंशों की वीरता, स्थापत्य कला और संघर्षों की जीवित कहानियां हैं। समय की धूल में दबे ये दुर्ग कभी सामरिक शक्ति, राजशाही वैभव और सांस्कृतिक समृद्धि के केंद्र हुआ करते थे। आज भी इनके टूटे परकोटे, गुप्त सुरंगें और विशाल द्वार अतीत की गौरवगाथा सुनाते हैं।

by Mujtaba Haider Rizvi
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Ranchi: झारखंड के जंगलों, पहाड़ियों और नदियों के बीच आज भी इतिहास सांस लेता है। यहां के प्राचीन किले (Forts Of Jharkhand) सिर्फ पत्थरों की इमारतें नहीं, बल्कि नागवंशी, चेरो और रक्सेल राजवंशों की वीरता, स्थापत्य कला और संघर्षों की जीवित कहानियां हैं। समय की धूल में दबे ये दुर्ग कभी सामरिक शक्ति, राजशाही वैभव और सांस्कृतिक समृद्धि के केंद्र हुआ करते थे। आज भी इनके टूटे परकोटे, गुप्त सुरंगें और विशाल द्वार अतीत की गौरवगाथा सुनाते हैं।

झारखंड का नाम आते ही आंखों के सामने घने जंगल, पहाड़, झरने और आदिवासी संस्कृति की तस्वीर उभरती है। लेकिन इस धरती की पहचान केवल प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है। झारखंड का इतिहास भी उतना ही समृद्ध और रोमांचक रहा है। यहां मौजूद प्राचीन किले (Forts Of Jharkhand) और महल इस बात के प्रमाण हैं कि कभी यह क्षेत्र शक्तिशाली राजवंशों, वीर योद्धाओं और अद्भुत स्थापत्य कला का केंद्र हुआ करता था।नागवंशी, चेरो और रक्सेल राजाओं ने यहां ऐसे दुर्गों का निर्माण कराया, जो सुरक्षा, रणनीति और वास्तुकला के अद्भुत उदाहरण माने जाते हैं। इनमें कई किलों (Forts of Jharkhand) के नीचे गुप्त सुरंगें थीं, तो कई दुर्ग पहाड़ियों और जंगलों के बीच इस तरह बनाए गए थे कि दुश्मनों के लिए उन तक पहुंचना लगभग असंभव था।

Forts Of Jharkhand : नवरत्नगढ़ किला,जमीन में समाया रहस्य

गुमला जिले में स्थित नवरत्नगढ़ किला, जिसे दोईसागढ़ भी कहा जाता है, झारखंड की सबसे रहस्यमयी ऐतिहासिक धरोहरों में गिना जाता है। इसका निर्माण 17वीं शताब्दी में नागवंशी राजा दुर्जनशाल ने कराया था। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार यह किला मूल रूप से पांच मंजिला था और हर मंजिल में नौ कमरे बने थे।हालांकि स्थानीय जनश्रुतियों में कहा जाता है कि यह नौ मंजिला महल था, जिसकी छह मंजिलें जमीन में धंस गईं। आज भी यहां के विशाल परकोटे, कंगूरा शैली की दीवारें और ‘खजाना घर’ पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। कहा जाता है कि सुरक्षा के लिए इसमें गुप्त तहखाने और सुरंगें भी बनाई गई थीं।भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा यहां खुदाई का कार्य किया गया है और वर्ष 2019 में इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया। यह किला (Forts of Jharkhand) नागवंशी स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।

Forts Of Jharkhand : पलामू का जुड़वां किला

जंगलों में छिपी वीरता की कहानीलातेहार जिले के बेतला नेशनल पार्क के भीतर औरंगा नदी के किनारे स्थित पलामू का किला झारखंड की सबसे ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। यह ‘जुड़वां किला’ के नाम से प्रसिद्ध है, क्योंकि यहां दो किले मौजूद हैं—पुराना किला और नया किला। इतिहासकारों के अनुसार पुराने किले का निर्माण चेरो शासक अनंत राय ने कराया था, जबकि नए किले का निर्माण उनके उत्तराधिकारी राजा मेदिनी राय ने 17वीं शताब्दी में करवाया। कुछ इतिहासकार यह भी मानते हैं कि पुराने किले की मूल संरचना रक्सेल राजपूतों ने बनाई थी, जिसे बाद में चेरो राजाओं ने अपने नियंत्रण में लेकर विस्तार दिया। पुराना किला लगभग 18 एकड़ क्षेत्र में फैला है और इसकी मोटी दीवारें तथा विशाल द्वार इसे मजबूत सुरक्षा प्रदान करते थे। वहीं नया किला पहाड़ी पर बनाया गया था, जहां से आसपास के जंगलों पर नजर रखी जा सकती थी। इसके नागपुरी द्वार पर आज भी चेरो राजाओं से जुड़े शिलालेख मौजूद हैं। करीब दो दशकों बाद अब इन किलों के संरक्षण और पुनरुद्धार की योजना बनाई जा रही है। यदि यह परियोजना सफल होती है तो पलामू के ये ऐतिहासिक दुर्ग देश के प्रमुख हेरिटेज टूरिज्म स्थलों में शामिल हो सकते हैं।

Forts Of Jharkhand : तेलियागढ़ी किला, बंगाल का ऐतिहासिक प्रवेश द्वार

साहिबगंज जिले के राजमहल पहाड़ियों के बीच स्थित तेलियागढ़ी किला मध्यकालीन भारत में सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता था। इसे ‘बंगाल का प्रवेश द्वार’ भी कहा जाता था, क्योंकि उत्तर भारत से बंगाल जाने का मुख्य मार्ग इसी क्षेत्र से होकर गुजरता था। इस किले पर अलग-अलग समय में पाल शासकों, मुगलों और अन्य राजवंशों का नियंत्रण रहा। राजमहल की पहाड़ियों और गंगा के किनारे इसकी स्थिति इसे प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करती थी। इतिहास में यह क्षेत्र कई युद्धों और राजनीतिक संघर्षों का गवाह रहा है।

Forts Of Jharkhand : झरियागढ़ और कतरासगढ़, कोयलांचल की खोई हुई विरासत

धनबाद क्षेत्र में स्थित झरियागढ़ किला लगभग 500 वर्ष पुराना माना जाता है। कहा जाता है कि इसका निर्माण राजा मानसिंह ने कराया था। यह किला कभी राजशाही संस्कृति और वैभव का केंद्र हुआ करता था।इसी तरह कतरासगढ़ क्षेत्र में भी कई महलों और किलों के अवशेष मिलते हैं, जो इस इलाके की समृद्ध ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की ओर संकेत करते हैं। हालांकि समय और उपेक्षा के कारण इन संरचनाओं का बड़ा हिस्सा नष्ट हो चुका है।

Forts Of Jharkhand : रामगढ़ और बादम किला: मुगल शैली की झलक

Badam Fort

रामगढ़ का किला अपनी स्थापत्य शैली के लिए प्रसिद्ध है। इसका निर्माण रामगढ़ नरेश सबल राय ने कराया था और इसकी वास्तुकला में मुगल शैली का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है। वहीं हजारीबाग जिले के बादम में स्थित बादम किला 1642 ईस्वी में रामगढ़ नरेश हेमंत सिंह द्वारा बनवाया गया था। किले के साथ उन्होंने यहां एक भव्य शिव मंदिर का भी निर्माण कराया था। यह किला आज भी क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान बना हुआ है।

Forts Of Jharkhand : पद्मा किला, इतिहास से प्रशासन तक

हजारीबाग जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-33 के किनारे स्थित पद्मा किला कभी स्थानीय राजाओं की सत्ता का प्रतीक था। वर्तमान में राज्य सरकार ने इसे पुलिस प्रशिक्षण केंद्र के रूप में उपयोग करना शुरू कर दिया है। यह उदाहरण बताता है कि कैसे ऐतिहासिक इमारतों को आधुनिक उपयोग से भी जोड़ा जा सकता है।

इतिहास और पर्यटन का अनमोल संगम

झारखंड के ये किले केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान भी हैं। इनमें से कई किले अब भी घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच खामोश खड़े हैं, मानो किसी भूली हुई कहानी को दोहराने की प्रतीक्षा कर रहे हों। यदि इन ऐतिहासिक धरोहरों का सही तरीके से संरक्षण और प्रचार-प्रसार किया जाए, तो झारखंड देश के प्रमुख हेरिटेज टूरिज्म केंद्रों में अपनी अलग पहचान बना सकता है। इन किलों के भीतर सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि रहस्य, वीरता, स्थापत्य कला और संस्कृति की सदियों पुरानी गूंज आज भी जीवित है।

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