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Jharkhand Health News : हर बार गैस नहीं होता पेट दर्द! गॉलब्लैडर में पथरी का खतरा बढ़ा सकती हैं आपकी ये 7 आदतें

by Rakesh Pandey
Jharkhand Health News
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जमशेदपुर : पेट में बार-बार दर्द होने पर लोग अक्सर गैस या एसिडिटी की दवा लेकर राहत पाने की कोशिश करते हैं। लेकिन ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द, खासकर भोजन के बाद परेशानी बढ़ना, गॉलब्लैडर यानी पित्ताशय की पथरी का संकेत भी हो सकता है। ऐसे लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के सर्जन डॉ. एस. पी. गुप्ता के अनुमोदन हेतु तैयार इस स्वास्थ्य आलेख में खानपान, वजन और दिनचर्या से जुड़े उन पहलुओं को समझाया गया है, जो पथरी के जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं।

पित्त की थैली में कैसे बनती है पथरी?

पित्ताशय में लिवर से बनने वाला पित्त संग्रहित रहता है, जो वसा के पाचन में मदद करता है। पित्त में कुछ पदार्थों का असंतुलन और पित्ताशय का ठीक से खाली नहीं होना पथरी बनने में भूमिका निभा सकता है। पारिवारिक इतिहास, उम्र, मोटापा और कुछ बीमारियां भी जोखिम बढ़ाती हैं। इसलिए इसे केवल गलत खानपान का परिणाम समझना सही नहीं है।

भोजन छोड़ना और तेजी से वजन घटाना

पहली आदत है लंबे समय तक भूखे रहना। इससे पित्ताशय के नियमित खाली होने पर असर पड़ सकता है। दूसरी आदत है जल्द पतला होने के लिए क्रैश डाइट अपनाना। बहुत तेजी से वजन घटने से पथरी का जोखिम बढ़ सकता है। वजन नियंत्रित करने के लिए संतुलित भोजन और धीरे-धीरे बदलाव अपनाना बेहतर है।
डॉ. एस. पी. गुप्ता के लिए तैयार इस मसौदे में वजन घटाने और पथरी से बचाव के संबंध को विशेष स्थान दिया गया है।

तला भोजन, कम फाइबर और जंक फूड

तीसरी आदत है तली हुई तथा अधिक संतृप्त वसा वाली चीजें जरूरत से ज्यादा खाना। चौथी है फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज कम लेना। पांचवीं आदत है जंक फूड और पैकेटबंद स्नैक्स को नियमित भोजन का विकल्प बना देना।
इन आदतों से अतिरिक्त कैलोरी लेना आसान हो जाता है और वजन संभालना मुश्किल हो सकता है। भोजन में फाइबर बढ़ाएं तथा अधिक मीठे और रिफाइंड खाद्य पदार्थ सीमित रखें। सभी प्रकार की वसा बंद करना जरूरी नहीं; उसकी मात्रा और गुणवत्ता मायने रखती है।

घंटों बैठना और बढ़ते वजन को टालना

छठी आदत है दिनभर बैठे रहना और शारीरिक गतिविधि कम करना। सातवीं है लगातार बढ़ते वजन के बावजूद दिनचर्या में सुधार नहीं करना। मोटापा पित्त की पथरी का जोखिम कारक है। नियमित चलना, क्षमता के अनुसार व्यायाम और संतुलित भोजन वजन नियंत्रित रखने में मदद करते हैं।

दर्द के साथ बुखार या पीलापन हो तो सतर्क रहें

एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के सर्जन डॉ. एस. पी. गुप्ता के अनुमोदन हेतु इस आलेख में समय पर जांच की जरूरत भी प्रमुखता से रखी गई है। तेज या कई घंटों तक बना पेट दर्द, बुखार, लगातार उल्टी अथवा आंखों में पीलापन होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें। केवल आहार बदलने से बनी हुई पथरी नहीं घुलती। जांच के आधार पर डॉक्टर उपचार तय करते हैं।

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