रांची : एचईसी (Heavy Engineering Corporation) के विस्थापितों के लिए विधानसभा के पास बनाए गए 393 आवास जल्द ही उनके हवाले किए जाएंगे। यह जानकारी नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने गुरुवार को विधानसभा के बजट सत्र में भा.ज.पा. विधायक नवीन जायसवाल के सवाल के जवाब में दी।
मंत्री का विस्थापन के मुद्दे पर बयान
मंत्री ने यह भी कहा कि कुटे, आनी, मुड़मा, लाबेद और तिरिल के रैयतों को एचईसी की बची हुई जमीन लौटाने के बारे में पूछा गया था, इस पर उन्होंने कहा कि एचईसी केंद्र सरकार का उपक्रम है। अगर केंद्र सरकार रैयतों की जमीन राज्य सरकार को लौटाती है, तो राज्य सरकार इसे तुरंत रैयतों को दे देगी। उन्होंने कहा, “एचईसी से जुड़े विस्थापन का मामला वृहद है, लेकिन हमारी सरकार विस्थापितों को आवास देने की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने का प्रयास करेगी।”
विधायक का आरोप
वहीं, इस मामले पर विधायक नवीन जायसवाल ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती रघुवर दास सरकार द्वारा बनवाए गए इन 393 आवासों को पिछले पांच वर्षों में जानबूझकर विस्थापितों को नहीं दिया गया। उनका कहना था कि इन आवासों में प्रत्येक विस्थापित के लिए छह डिसमील जमीन पर जी+4 आवास बनाए गए हैं, और इनकी कीमत लगभग दो करोड़ रुपये प्रति आवास है।
विधानसभा में हुई वोटिंग
मंत्री के जवाब के बाद इस मुद्दे पर विधायक नवीन जायसवाल ने अविस्ताव (Motion) वापस नहीं लिया, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने वोटिंग कराई। हालांकि, अविस्ताव के विपक्ष में बहुमत रहने के कारण यह अविस्ताव गिर गया।

