Ranchi (Jharkhand) : झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी (Anti-Corruption Bureau) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे और संयुक्त सचिव गजेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। इन दोनों अधिकारियों को आज सुबह से ही एसीबी की टीम पूछताछ के लिए हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही थी। पूछताछ के बाद मेडिकल जांच कराई गई और फिर दोनों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मंगलवार को कथित आबकारी घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किए गए व्यक्ति ने धोखाधड़ीपूर्ण गतिविधियों में लिप्त होकर और अपने पद का दुरुपयोग करते हुए राज्य को 38 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया।
पद का दुरुपयोग और सरकार के साथ धोखाधड़ी का आरोप
एसीबी को इन अधिकारियों के खिलाफ पुख्ता सबूत मिले हैं, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई। आरोप है कि आईएएस विनय कुमार चौबे ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए झारखंड सरकार को लगभग 38 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया। इसी मामले में संयुक्त सचिव गजेंद्र सिंह की भी संलिप्तता सामने आई है।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़ा है मामला
यह घोटाला 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ में हुए कथित शराब घोटाले से जुड़ा हुआ है, जिसकी आंच अब झारखंड तक पहुंच चुकी है। आरोप है कि रायपुर स्थित एक सिंडिकेट ने फर्जी होलोग्राम का इस्तेमाल कर झारखंड में नकली शराब की आपूर्ति की और इसी प्रक्रिया में करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ।
इस सिंडिकेट में छत्तीसगढ़ के पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर सहित कई अन्य आरोपी बनाए गए हैं। अब झारखंड के भी वरिष्ठ अधिकारी इस घोटाले में घिरते नजर आ रहे हैं। चौबे 1999 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष अदालत द्वारा 3 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजे दिया गया। उसके बाद उन्हें रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार ले जाया गया।
मंगलवार की शाम जारी एक बयान में झारखंड सरकार ने कहा है कि चौबे ने धोखाधड़ी, आपराधिक तत्वों के साथ मिलीभगत और अपने पद के दुरुपयोग के माध्यम से राज्य को 38 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया है।
सरकार ने यह भी कहा है कि मदिरा दुकानों के संचालन और बिक्री के लिए प्लेसमेंट एजेंसियों के चयन में उन्होंने नियमों का पालन नहीं किया। बता दें कि चौबे कई अहम पदों पर रह चुके हैं, जिनमें मुख्यमंत्री के सचिव का पद भी शामिल है। वर्तमान में वे पंचायती राज विभाग में प्रधान सचिव के रूप में तैनात हैं।
विकास सिंह की शिकायत पर शुरू हुई थी जांच
इस पूरे मामले की जड़ें रांची के अरगोड़ा थाना क्षेत्र से जुड़ी हैं, जहां के निवासी विकास सिंह ने सबसे पहले छत्तीसगढ़ के अधिकारियों और कारोबारियों पर अरबों रुपये के शराब घोटाले का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। उसी शिकायत के आधार पर आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने जांच शुरू की और धीरे-धीरे झारखंड के अफसरों की भूमिका भी उजागर हुई। विकास सिंह का यह भी दावा है कि झारखंड में शराब नीति में जो बदलाव किया गया था, वह भी इसी सिंडिकेट में शामिल अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ।
पहले भी दर्ज कराया था बयान
गौरतलब है कि अप्रैल 2023 में इसी शराब घोटाले के सिलसिले में आईएएस विनय कुमार चौबे और कर्ण सत्यार्थी ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रायपुर कार्यालय में जाकर अपना बयान दर्ज कराया था। तब से इस घोटाले में इनकी भूमिका को लेकर संदेह बना हुआ था, जो अब गिरफ्तारी में तब्दील हो गया।

