Home » Jamshedpur news : इंकैब इंडस्ट्रीज कर्मियों पर दोहरी मार : बकाया भुगतान के बीच अब बिजली सुरक्षा राशि का बोझ, कर्मचारियों में बढ़ी नाराजगी

Jamshedpur news : इंकैब इंडस्ट्रीज कर्मियों पर दोहरी मार : बकाया भुगतान के बीच अब बिजली सुरक्षा राशि का बोझ, कर्मचारियों में बढ़ी नाराजगी

इंकैब क्षेत्र के लगभग 1,050 फ्लैट, क्वार्टर और बंगलों में रहने वाले कर्मचारियों एवं अधिकारियों को जमा करनी होगी बिजली सुरक्षा राशि

by Arvind Shrivastava
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

Jamshedpur : वर्षों से आर्थिक संकट और बकाया भुगतान की समस्या झेल रहे इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड के कर्मचारियों के सामने अब एक और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। कंपनी के पुनरुद्धार की प्रक्रिया के बीच इंकैब कॉलोनी में रहने वाले कर्मचारियों, अधिकारियों और उनके परिवारों पर बिजली के लिए सिक्योरिटी मनी (सुरक्षा राशि) जमा कराने का अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया है। इससे कर्मचारियों में असंतोष और चिंता का माहौल है। इंकैब के पुनरुद्धार के लिए वेदांता समूह द्वारा अधिग्रहण की प्रक्रिया के बाद कर्मचारियों को नई उम्मीदें मिली थीं, लेकिन बकाया भुगतान पूरी तरह नहीं मिलने और अब बिजली संबंधी अतिरिक्त आर्थिक भार ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।                                                           यूआईएसएल पूरे इंकैब क्षेत्र को एक इकाई (क्लाइंट) मानकर बिजली आपूर्ति

जानकारी के अनुसार, इंकैब क्षेत्र के लगभग 1,050 फ्लैट, क्वार्टर और बंगलों में रहने वाले कर्मचारियों एवं अधिकारियों को बिजली कनेक्शन जारी रखने के लिए सुरक्षा राशि जमा करनी होगी। अभी तक क्षेत्र में बिजली आपूर्ति एकीकृत व्यवस्था के तहत होती रही, लेकिन अब नई व्यवस्था लागू किए जाने से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय जिम्मेदारी आ गई है।
बताया जाता है कि टाटा स्टील यूआईएसएल (Tata Steel UISL) पूरे इंकैब क्षेत्र को एक इकाई (क्लाइंट) मानकर बिजली आपूर्ति करती है। इसके तहत विभिन्न समितियों के माध्यम से पूरे क्षेत्र में बिजली का वितरण होता रहा है। अब बिजली दरों में बदलाव के साथ सुरक्षा राशि जमा कराने की प्रक्रिया शुरू किए जाने से कर्मचारियों की चिंता बढ़ गई है।                          बिजली सुरक्षा राशि जमा कराने का बनाया जा रहा दबाव
कर्मचारियों का कहना है कि एक ओर उन्हें वर्षों का बकाया भुगतान अब तक पूरी तरह प्राप्त नहीं हुआ है, वहीं दूसरी ओर बिजली सुरक्षा राशि जमा कराने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में अतिरिक्त राशि जमा करना अधिकांश परिवारों के लिए आसान नहीं है।
श्रमिक प्रतिनिधियों का मानना है कि कंपनी प्रबंधन और संबंधित एजेंसियों को कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए कोई व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए। उनका सुझाव है कि सुरक्षा राशि किस्तों में ली जाए अथवा बकाया भुगतान के साथ इसका समायोजन किया जाए, ताकि कर्मचारियों पर तत्काल आर्थिक बोझ न पड़े।
औद्योगिक जानकारों का कहना है कि किसी भी बीमार उद्योग के पुनरुद्धार में कर्मचारियों का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि पुनरुद्धार के शुरुआती दौर में ही कर्मचारियों पर अतिरिक्त वित्तीय भार डाला जाएगा, तो इसका असर कार्य वातावरण और औद्योगिक संबंधों पर पड़ सकता है।                   कुल आठ कमेटी के माध्यम से बिजली बिल वसूला जा रहा है। यह आठ कमिटियां क्षेत्रवार कर एक एक घर से बिजली बिल वसूल करती है ।    “बिजली सुरक्षा राशि जमा करने में सभी असमर्थ है। कॉलोनीवासी नियमित बिजली चाहते हैं, लेकिन उनके पास एक मुश्त पैसे देने में दिक्कत है। ऐसे में कंपनी को चाहिए एक एक घर से बिजली सुरक्षा राशि वसूलने की व्यवस्था करें।” राजेश कुमार सिंह केबुलवासी

Related Articles

Leave a Comment