नई दिल्ली : भारत की अर्थव्यवस्था वित्तीय वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में 7.8 फीसदी की दर से बढ़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार यह शानदार शुरुआत है, क्योंकि अभी के समय में पूरे विश्व में भारत की विकास दर किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था की तुलना में सबसे तेज है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने पहली तिमाही के लिए जीडीपी के आंकड़े जारी कर दिए हैं। फर्स्ट क्वार्टर के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था को मिली शानदार शुरुआत के मुख्य फैक्टर की बात करें, तो इसमें उपभोक्ता मांग और सर्विस सेक्टर की उच्च गतिविधि शामिल हैं।
चीन से आगे है भारत
बीते वित्त वर्ष 2022-23 की समान तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 13.1 प्रतिशत रही थी। इसके साथ ही भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से वृद्धि करने वाला देश बना हुआ है। चीन की जीडीपी वृद्धि दर अप्रैल-जून तिमाही में 6.3 प्रतिशत रही है। एनएसओ के आंकड़ों के अनुसार, कृषि क्षेत्र में सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही में 3.5 प्रतिशत रहा, जो एक साल पहले 2022-23 की इसी तिमाही में 2.4 प्रतिशत था।
राजकोषीय घाटे लगभग 34 फीसदी पहुंचा
खर्च और राजस्व के बीच का जो अंतर होता है, उसे राजकोषीय घाटा कहते हैं। बता दें कि सीजीए द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार मौजूदा वित्तीय वर्ष 2023-24 के पहले चार महीने यानी जुलाई तक में ही केंद्र का राजकोषीय घाटा पूरे साल के लक्ष्य का 33.9 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
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कैसे तय होता है जीडीपी?
जीडीपी को नापने की जिम्मेदारी सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के तहत आने वाले सेंट्रल स्टेटिस्टिक्स ऑफिस यानी केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय की होती है। यह ऑफस ही पूरे देा से डाटा इकट्ठा करके उसका कैलकुलेशन करके आंकड़ा जारी करता है।

