Jamshedpur : एनसीएलटी कोलकाता में जमशेदपुर की केबुल कंपनी को लेकर हुए फैसले के खिलाफ मजदूरों ने आवाज बुलंद की है। केबुल कंपनी के मजदूरों के लिए संघर्ष करने वाली केबुल संघर्ष समिति ने मंगलवार को एक मीटिंग में फैसला लिया गया है कि एनसीएलटी कोलकाता के फैसले को सुप्रीम कोर्ट और एनसीएलटी दिल्ली में चैलेंज किया जाएगा।
केबुल संघर्ष समिति के महामंत्री यूके शर्मा ने कहा की केबुल कंपनी को वेदांता कंपनी को देने का फैसला हुआ है। लेकिन मजदूरों के हित को लेकर कई बिंदुओं पर इस फैसले में कोई चर्चा नहीं की गई। उनका कहना है कि इस फैसले से मजदूर नाराज हैं। उन्होंने कहा कि 1100 के करीब रिटायर्ड कर्मचारी हैं, जिनका पीएफ, ईसीआई और बकाया वेतन की रकम मिलनी चाहिए। इसके अलावा 500 ऑन रोल कर्मचारी हैं जिनका फैसले में कोई जिक्र नहीं किया गया है। इनकी नौकरी बरकरार रहनी चाहिए।
यूके शर्मा ने कहा कि 31 मार्च साल 2000 तक कंपनी में 4 करोड़ 53 लाख 66 हजार 69 रुपए का तैयार माल था। इसमें से एक करोड़ 95 लाख 5357 रुपए का माल बेचा गया था। शेष 3 करोड़ 24 लाख 10712 रुपए का माल कहां गया। उन्होंने कहा कि 30 दिसंबर 1999 तक केबुल कंपनी ने 16 करोड़ 69 लाख 54 हजार एक रुपए की परिसंपत्ति खरीदी थी। 31 दिसंबर साल 2000 तक 264 लोग इस कंपनी से रिटायर हुए थे। उस अवधि में इनकी 2 करोड़ 70 लाख 41 हजार 95 रुपए की ग्रेच्युटी की राशि बकाया है। इस राशि में से मात्र 65 हजार रुपए का ही भुगतान हुआ था। जबकि 1 लाख 8674 का चेक कैश फीस में जमा किया गया था।
महामंत्री ने कहा कि 31 दिसंबर साल 2000 तक स्टेट्यूटरी ड्यूज़ 13 करोड़ 15 लाख 26800 रुपए बकाया था। जो आज गलत तरीके से 46 अरब रुपया दिखाया जा रहा है।
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